ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। 12 बजे शपथ ग्रहण समारोह के बाद शाम चार बजे नगर निगम ऋषिकेश की पहली बोर्ड की पहली बैठक हुई। इसकी औपचारिकता परिचय सत्र से की गई। सदन की पहली कार्यवाही का आगाज गर्मागरम बहस के साथ शुरू हुआ। खास बात यह रही कि पहली बैठक में कुल तीन प्रस्ताव पास हुए, जोकि महापौर अनिता ममगाईं की ओर से ही आए थे। पहले प्रस्ताव के तहत गोविंद नगर में बने ट्रंचिंग ग्राउंड का मुद्दा रखा गया। इसको लेकर सभी पार्षद सहमत दिखे। साथ ही निगम प्रशासन के ढीले रवैये पर एतराज भी जताया गया।
शपथ ग्रहण के दिन ही भाजपा को समर्थन देने वाले विकास तेवतिया ने सहायक नगर आयुक्त से ट्रंचिंग ग्राउंड को लेकर अब तक हुए प्रयासों की जानकारी मांगी। इस पर सहायक नगर आयुक्त उत्तम सिंह नेगी ने बताया कि पालिका प्रबंधन के दौरान ही मुनिकीरेती, स्वार्गाश्रम और ऋषिकेश के लिए 20 हेक्टेयर भूमि तलाशी गई थी। इसे व्यवस्थित करने के लिए करीब 53 पेड़ कटने हैं। इसी को लेकर एनजीटी ने आपत्ति लगा दी है। इसके चलते हम लोग सुप्रीम कोर्ट भी गए जहां मामले की सुनवाई जारी है। उन्होंने बताया कि जल्द ही ट्रंचिंग ग्राउंड का मसला हल हो जाएगा। इसके लिए शासन की ओर से भी पूरा प्रयास हो रहा है। इस पर कांग्रेस की ओर से मनीष शर्मा ने प्रस्ताव रखा कि गोविंद नगर स्थित मौजूदा ट्रंचिंग ग्राउंड को खाली करने के बाद उस पर स्पोर्ट्स स्टेडियम का निर्माण किया जाए। इसका सभी सदस्यों ने मेज थपथपा कर स्वागत किया।
सब्जी मंडी से नीम करोली तक स्ट्रीट लाइट लगेगी
दूसरे प्रस्ताव के तहत निगम बोर्ड ने बड़ी सब्जी मंडी से नीम करोली तक डिवाइडर के बीच दोनों ओर स्ट्रीट लाइट का जाल बिछाने का निर्णय लिया है। अंधेरा होने के कारण यहां आए दिन मार्ग दुर्घटनाएं होती रहती हैं। तीसरे प्रस्ताव के तहत तहसील चौक एवं आईडीपीएल गेट के समीप डिवाइडर और गोल चक्कर का निर्माण कराया जाएगा। इस पर सहायक नगर आयुक्त ने बताया कि हमें सिर्फ एनएएच को प्रस्ताव भेजना है वो खुद बनवा देंगे।
पुरानी व्यवस्था नहीं चलेगी
बोर्ड बैठक के दौरान प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान मिनट रजिस्टर रखना भूल गए। इसका संज्ञान लेते हुए कांग्रेस के पार्षद मनीष शर्मा ने कड़े लहजे में आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जितनी भी कार्यवाही हो रही है वो मिनट रजिस्टर में दर्ज होनी चाहिए। अब पुरानी व्यवस्था नहीं चलेगी। इसके साथ ही पुराने टेंडरों का मसला भी उठा। कांग्रेस की ही राधा रमोला ने कहा कि सितंबर में टेंडर इश्यू होने के बाद काम नहीं शुरू हो पाए। इसमें निगम प्रबंधन का भी लचर रवैया रहा। भाजपा की ओर से शिवकुमार गौतम ने कहा कि निगम अफसरों को पुरानी परिपाटी बदलनी चाहिए। यदि एक हफ्ते में काम नहीं शुरू हो पाता है तो नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाए। इस पर सभी ने सहमति जताई।
सदन की मर्यादाएं भी नहीं निभीं
नए नवेले नगर निगम की बोर्ड बैठक में भी व्यवस्थागत बचकानापन देखने को मिला। शायद ये पहला निगम होगा जहां सदन की कार्यवाही में पार्षदों के साथ पीछे की कुर्सी पर उनके परिजन भी भाग लेते देखे गए। मजे की बात तो यह कि निगम प्रशासन ने भी इसका संज्ञान नहीं लिया। पहली बोर्ड बैठक आननफानन में आयोजित तो कर दी गई लेकिन सदस्यों को एजेंडा तक व्यवस्थित तरीके से वितरित नहीं किया गया। निगम प्रशासन की ओर से सहायक नगर आयुक्त उत्तम सिंह नेगी भी आधी अधूरी तैयारी के साथ सदन में बैठे। यही वजह रही कि क्षेत्र का विस्तार होने के बाद कितने अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी, इसका ब्योरा नहीं दे पाए।
निगम को चाहिए कर्मचारियों की फौज
- चालक, सफाईकर्मी, क्लर्क, सहित करीब तीन सौ कर्मचारियों की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। पालिका से उच्चीकृत होकर ऋषिकेश नगर निगम तो बन गया लेकिन बुनियादी जरूरतें अब भी नदारद हैं। नगर में सबसे बड़ी समस्या सफाई की है। इसको लेकर बोर्ड की पहली बैठक में भी बहस हुई। पार्षदों ने महापौर अनिता ममगाईं से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार सफाई न होने की शिकायतें आ रही हैं। सूचना देने के बावजूद कूड़ा उठान नहीं हो पा रहा है। इस पर सहायक नगर आयुक्त उत्तम सिंह नेगी ने कर्मचारियों की किल्लत का हवाला दिया। असलियत यह है कि नए निगम में अभी करीब 300 कर्मचारियों की जरूरत है।
पार्षदों का कहना है कि जीत के साथ ही हमसे अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। लिहाजा हम ये तर्क नहीं दे सकते कि अभी पहली बोर्ड मीटिंग हुई है धीरे धीरे सब सही होगा। इस संदर्भ में निगम के कर्मचारी संगठन उत्तरांचल स्वच्छकार कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नरेश खैरवाल का कहना है कि क्षेत्र अब दोगुना बढ़ गया है। इसके मद्देनजर करीब 20 सुपरवाइजर, 200 सफाइकर्मी, 15 बाबू, 10 चालक, दो डोजर और दो जेसीबी की आवश्यकता है। इस पर सहायक नगर आयुक्त उत्तम सिंह नेगी ने बताया कि सभी भर्तियां उपनल से होंगी। शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है।