श्रीनगर। गढ़वाल विवि के दीक्षांत समारोह में बेटियों पर खूब सोना बरसा। 57 स्वर्ण पदकों में से 44 स्वर्ण पदक छात्राओं को मिले। दीक्षांत समारोह में करीब 300 छात्रों को उपाधियां वितरित की गई, जिसमें पीएचडी व परास्नातक के छात्र शामिल हैं।
शनिवार को एचएनबी गढ़वाल विवि का 6वां दीक्षांत समारोह चौरास परिसर स्थित ऑडीटोरियम में आयोजित किया गया। समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि भारतीय तटरक्षक बल के डीजी राजेंद्र सिंह, कुलाधिपति योगेंद्र नारायण व कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने किया। कुलपति प्रो. नौटियाल ने विवि की रिपोर्ट समारोह में प्रस्तुत की। इसके बाद 11 स्कूलों के विभिन्न विषयों में छात्रों को उपाधियां प्रदान की गई, जिसके तहत पीएचडी के 106 व पीजी के 228 छात्रों को उपाधियां दी गई। 57 स्वर्ण पदक विजेता छात्रों को मुख्य अतिथि राजेंद्र सिंह, कुलाधिपति योगेंद्र नारायण व कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल पदक प्रदान किए। इस मौके पर कुलसचिव डा. एके झा सहित कई मौजूद थे। संचालन प्रो. पीके जोशी ने किया।
इन्हें मिला स्वर्ण पदक
श्रीनगर। पल्लवी शर्मा, अंशुमन जोशी, अंजलि, गुंजन सुयाल, बीरेंद्र सिंह, कामनी देवी, नंद किशोर आर्य, अंजलि, मिताली कंडारी, नाजिया, अंकिता, गीता, प्रियंका चौहान, अंकिता बिष्ट, सोनाली अग्रवाल, रश्मि प्रभा, घनश्याम कुमार रॉय, नितेश खंतवाल, श्वेता वर्मा, मनस्वी सेमवाल, शाइना परवीज, रंजना, शिवानी भगत, शिल्पी अग्रवाल, रीना रावत, शाहीन परवीन, अंजलि गुसाईं, दीपा कुमारी, नेहा शर्मा, सुनील बलूनी, राहुल खत्री, रिग्जिम अंगमो, मोनिका, श्रेयाकर, अजेयता राठी, सोनल वाष्णेय, किमी यादव, श्वेता वर्मा, अमित नेगी, कविता उनियाल, मोनिका बिष्ट, अदिति कपिल, आरजू भंडारी, यक्षी अरोड़ा, सोनम बहुगुणा, प्रेमी मुर्री, आयुषी मीठू, कुचिपुड़ी मोहन किशोर, प्रज्ञा तोपाल, नित्यानंद, अंजलि, पूनम नेगी, आशीष कुमार, मनीष सिंह अधिकारी, हिमानी पंत, संजय जयाड़ा, कंचन रौथाण।
परिधान पाश्चात्य, संस्कार भारतीय
दीक्षांत समारोह में छात्रों ने भले ही पाश्चात्य परिधान (दीक्षांत के लिए निर्धारित गाउन) पहना हो, लेकिन सभी छात्रों ने भारतीय संस्कारों का परिचय दिया। स्वर्ण पदक विजेता छात्रों को जब मुख्य अतिथि राजेंद्र सिंह व कुलाधिपति योगेंद्र नारायण ने स्वर्ण पदक व डिग्री प्रदान की तो छात्रों ने इन अतिथियों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
रंजना को मिले पांच स्वर्ण पदक
गढ़वाल विवि में संस्कृत (पीजी) की टॉपर रंजना को पांच स्वर्ण पदक मिले, जिसमें से एक विवि की ओर से तथा चार विभिन्न संगठनों व संस्थानों की ओर से दिए गए। विभिन्न संगठनों व संस्थानों की ओर से विवि को 14 स्वर्ण पदक मिले हैं, जो विभिन्न विषयों के टॉपरों को दिए गए।
13 साल बाद हुआ दीक्षांत समारोह
गढ़वाल विवि में 13 साल बाद दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। यह समारोह गढ़वाल विवि का 6वां व केंद्रीय गढ़वाल विवि का पहला दीक्षांत समारोह था।
स्थापना दिवस पर हुआ दीक्षांत समारोह
श्रीनगर। विवि का दीक्षांत समारोह स्थापना दिवस पर आयोजित किया गया। एक दिसंबर को गढ़वाल विवि का स्थापना दिवस भी मनाया जाता है।
दीर्घकालीक लक्ष्य तयकर तलाशें मौके : डीजी
एचएनबी गढ़वाल विवि के दीक्षांत समारोह में बोले
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। भारतीय तट रक्षक के महानिदेशक राजेंद्र कुमार ने कहा कि हमारी सोच की हमारा आचरण है, हमारी कार्य कुशलता ही हमारी ताकत है, हमारा व्यवहार की हमारी पहचान है। यह मूल्य प्रत्येक छात्र में होने जरूरी हैं। उन्होंने छात्रों को दीर्घकालीक लक्ष्य निर्धारित कर नए मौकों को तलाशने और सीख लेने को कहा। राजेंद्र सिंह यहां गढ़वाल विवि के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित कर रहे थे।
शनिवार को गढ़वाल विवि के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमंथन प्रेक्षागृह में आयोजित दीक्षांत समारोह में भारतीय तट रक्षक बल के निदेशक राजेंद्र सिंह मुख्य अतिथि मौजूद थे। इस दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड यंग स्टेट है और यहां के युवाओं में जोश व उत्साह है। यहां के अधिकतर लोग सैन्य बलों में तैनात हैं। सैन्य बलों में सबसे ज्यादा अधिकारी भी उत्तराखंड से हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि देश में परिवर्तन लाना है, तो तीन बातें अनेक स्रोतों से सीखें, रिस्क लेना जानें और हर समय शांत रहें। राजेंद्र सिंह ने कहा कि हमारी सोच ही हमारा आचरण है, हमारी कार्य कुशलता ही हमारी ताकत है, हमारा व्यवहार ही हमारी पहचान है, यह मूल्य प्रत्येक विद्यार्थी में होने जरूरी हैं।
स्थानीय समस्याओं का हो अध्ययन
श्रीनगर। गढ़वाल विवि के कुलाधिपति पूर्व आईएएस डा. योगेंद्र नारायण ने कहा कि अपने कार्यकाल में वह गढ़वाल विवि को उत्तराखंड का ज्ञान तीर्थ बनाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि विवि को प्रभावी होना है, तो यहां की स्थानीय समस्याओं का अध्ययन करना चाहिए। विवि की भविष्य में भूमिका थिंक टैंक की होनी चाहिए।