ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
एफएल-2 घोटाले एक बार फिर गरमा सकता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि वे इस मामले में जांच के लिए एक बार फिर प्रयास करेंगे। अजय भट्ट ने कहा कि इसे लेकर उन्होंने कई बार चिट्ठी लिखी, लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि सरकार ने इसमें क्या कदम उठाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मंगलवार को दून रोड स्थित एक होटल में भाजपा कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव होने के कारण एफएल-2 घोटाले से ध्यान हट गया था।
बता दें, वर्ष 2014 में शराब के एक खास ब्रांड को प्रमोट करने का आरोप तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत पर लगा था। इसे एफएल-2 घोटाले का नाम दिया गया। उससमय भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए जोर-शोर से इस मुद्दे को उठाया था। भाजपा सत्ता में आई तो इस घोटाले की जांच के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कई बार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखकर जांच कमेटी गठित करने की मांग की। फिलहाल अब तक सरकार इस मामले में कोई रुख अख्तियार नहीं कर पाई है।
निकाय चुनाव में हार की समीक्षा अभी बाकी
ऋषिकेश के इर्दगिर्द मिली हार पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हम सभी सीटों पर जीत गए होते तो विपक्ष क्या करता। लोकतंत्र में यह भी जरूरी है। दूसरे ही पल वे वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सभी पांच सीटों पर जीत का दावा भी करते दिखे। हालांकि उन्होंने कहा कि निकाय चुनावों की समीक्षा अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि हमने सात नगर निगम में से पांच में जीत दर्ज की है। करीब 365 सभासद पार्टी के टिकट से निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने कहा कि डोईवाला और हरिद्वार में हम अपनी हार स्वीकार करते हैं।
...हमारा कुर्ता फटते-फटते रह गया
निगम मेयर पद पर फतह के बाद पहली बार यहां भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने दबी जुबान चुटकी भी ली। प्रत्यशी घोषित होने के बाद जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर हुए प्रदर्शन की घटना को उन्होंने फिर से ताजा कर दिया। उन्होंने हंसते हुए कहा कि चुनाव के दौरान मेरा कुर्ता फटते-फटते रह गया। उन्होंने कहा कि समीक्षा के दौरान हमें अनुशासनहीनता के प्रमाण मिलेंगे तो पार्टी कड़ा रुख अख्तियार करेगी।
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प्रदेेश में राजधानी की दोहरी व्यवस्था पर हो रहा विचार
ऋषिकेश। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में जम्मू कश्मीर और महाराष्ट्र की तर्ज पर दोहरी राजधानी व्यवस्था का विचार कर रही है। इसमें गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने पर मंथन हो रहा है। सर्वप्रथम वहां आवास की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। इसके बाद अन्य मसलों को जमीन पर उतारा जाएगा।