ब्यूरो/अमर उजाल/ऋषिकेश।
चिकित्सकों की ओर से रोगी को दिया जाने वाला ट्रीटमेंट (इलाज) साक्ष्य आधारित होना चाहिए। ऐसे साक्ष्यों को जुटाने के लिए उच्च स्तरीय शोध की जरूरत होती है। उत्तराखंड के लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए एम्स शोध पर जोर देगा और रिसर्च प्रोजेक्ट को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।
यह बात एम्स के निदेशक प्रो. रविकांत ने रविवार को प्रो. रविकांत ने साइंटिफिक रिसर्च, लीडर शिप इन हेल्थ केयर और पेशेंट सेफ्टी विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर कहीं। कार्यशाला में एम्स के स्नातकोत्तर छात्र छात्राएं, नर्सिंग व मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर व पीएचडी स्कालर प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यशाला के पहले दिन विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक अनुसंधान की विधियां, रिसर्च पेपर राइटिंग आदि के तौर तरीके बताए। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ वेल्स प्रो. जॉयस कैंकरे ने शोध को उच्च स्तरीय व प्रभावशाली बनाने की विधि बताई। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पराग सिंघल ने कहा कि किसी बड़े से बड़े शोधकर्ता से भी गलती हो सकती है, लिहाजा बिना विश्लेषण के किसी शोध पर आंख बंद कर यकीन नहीं किया जा सकता। बहरीन मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर देवेंद्र संधू व यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ वेल्स के प्रोफेसर केशव सिंघल ने दूसरों के शोध की नकल से बचने का सुझाव दिया। मेडिकल एजुकेशन विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी राव ने बताया कि सोमवार को लीडरशिप इन हेल्थ केयर और मंगलवार को पेशेंट सेफ्टी विषय पर कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस मौके पर नर्सिंग कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेश शर्मा, प्रो. शालिनी राव, डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. तरुण गोयल, डॉ. राजेश काथरोटिया आदि मौजूद रहे।
शोध की राह में भाषा नहीं बनेगी रोड़ा
कार्यशाला के दौरान प्रो. रविकांत ने कहा कि अंग्रेजी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने से कई जन उपयोगी बेहतर अनुसंधान प्रकाशित नहीं हो पाते हैं। लिहाजा एम्स संस्थान शोधकर्ताओं को भाषा से जुड़े विशेषज्ञों के साथ ही साफ्टवेयर सुविधाएं भी मुहैया कराएगा। कार्यशाला में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ वेल्स, यूनाइटेड किंगडम प्रोफेसर मार्टिन स्टीगल ने बताया कि अनुसंधान में नैतिकता का ध्यान रखा जाना चाहिए, तभी विश्वसनीयता स्थापित हो पाती है। उन्होंने प्रतिभागियों को रिसर्च शुरू करने के तौर तरीके बताए।