श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेले की सांस्कृतिक संध्या में आयोजित महाभारत युद्ध की चक्रव्यूह कथा ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। रंगकर्मी विमल बहुगुणा की ओर से तैयार की गई पांडव वाणी दर्शकों को खूब पसंद आई। इसमें बहुगुणा ने चक्रव्यूह के सभी पात्रों के आपसी संवादों को दर्शकों के सम्मुख रखा। बताया कि महाभारत के 13 वें दिन गुरू द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह की रचना कर पांडवों को इसके भेदन का न्योता दिया, जिसमें कि महाभारत युद्ध के हार व जीत का फैसला होना था। इस दौरान चक्रव्यूह विधा के ज्ञाता अर्जुन बाहर गए थे। अब पांडवों की सेना में अर्जुन पुत्र अभिमन्यु के अलावा कोई भी चक्रव्यूह भेदन की विधा को नहीं जानता था। अभिमन्यु भी चक्रव्यूह के छह द्वारों को भेदन की विधा को ही जानता था। इसलिए चक्रव्यूह में कौरवों द्वारा किए गए छल कपट से अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त हो गए। दूसरी ओर रविवार को जीआईएंडटीआई मैदान में महिला कलाकारों की ओर से किए गए रामलीला मंचन को देखने बड़ी संख्या में दर्शक जुटे रहे। इस मौके पर महिला कलाकारों की ओर से प्रस्तुत धनुष खंड लीला व लक्ष्मण-परशुराम संवाद विशेष रोचक रहा।