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अधर में हाइवे ने बड़ाई राहगीरों की मुसीबत

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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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रायवाला। करीब आठ साल पहले रायवाला में नेशनल हाइवे निर्माण की कवायद शुरू हुई थी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इसके लिए जिस संस्था के साथ अनुबंध किया वह अनियमितता का शिकार हो गई और उससे काम छीनकर ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। दोबारा टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई। वर्तमान कंपनी से एक साल के भीतर काम पूरा करने का अनुबंध भी कर लिया गया। अब समस्या यह है कि कंपनी को काम शुरू करने के लिए एनएच की ओर से अधिकारिक पत्र नहीं उपलब्ध कराए गए हैं। लिहाजा 39 किमी की हरिद्वार-देहरादून फोर लेन नेशनल हाइवे परियोजना जस की तस पड़ी हुई है।
सरकारी अफसरों की लापरवाही किस तरह जनता के पैसे और समय का दुरुपयोग करती है इसका ताजा उदाहरण हाइवे निर्माण के रूप में देखा जा सकता है। दो बार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। पूर्व में कंपनी के कारनामे का जब तक पता चलता तब तक उसने बैंकों से मोटी राशि उठा ली थी। हालात यह हैं कि जिस उद्देश्य से नया टेंडर करवाया गया वह भी पूरा नहीं हो पा रहा है।
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परियोजना एक नजर में
39 किमी के हरिद्वार-देहरादून फोर लेन नेशनल हाइवे निर्माण की कवायद 2010 में शुरू हुई थी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस कार्य को पीपीपी मोड में बनाने का निर्णय लिया। पहले चरण में निर्माण पूरा करने की अवधि 2013 तय की गई। ये अवधि बीत गई तो दूसरी बार फिर से चहलकदमी शुरू हुई। इस बार निर्माण पूरा करने की मियाद 2016 तक तय हुई। ये संकल्प भी औंधे मुंह गिरा। तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई और कार्य पूरा करने की समय सीमा 2018 तय हुई। इसके तहत चार बड़े पुल और फलाई ओवर निर्माण होने हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि लचर कार्यप्रणाली के चलते सड़क निर्माण का काम महज 60 प्रतिशत और पुल निर्माण मात्र 30 प्रतिशत पूरा हुआ है। पूर्व में यह काम इरा इंफ्रा को दिया गया था। अब उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम के जिम्मे है।
वन-वे व्यवस्था से राहगीरों की मुसीबत
पिछले आठ साल से हाइवे निर्माण कार्य पूरा होने का नाम नहीं ले रहा है। इससे रागगीरों की मुसीबत बढ़ गई है। रायवाला पुलिस ने निर्माणधीन हरिद्वार-देहरादून नेशनल हाईवे की अधूरी पड़ी कच्ची सड़क पर ट्रैफिक को डायर्वट कर दिया है। इस पर सरपट दौड़ रहे हजारों वाहनों की आवाजाही से धूल के गुबार लोगों को सांस बीमारी दे रहे हैं। गंभीर पहलू यह है कि धूल के धुंध में सामने 10 मीटर भी वाहन या पैदल यात्री को देख पाना मुमकिन नहीं है।
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वर्तमान में टेंडर प्रक्रिया के तहत निर्माण का जिम्मा उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को मिला है। पिछले माह निगम की ओर से कम बोली के साथ उक्त हाईवे निर्माण का जिम्मा लिया गया है। एनएचएआई अवार्ड लेटर जारी नहीं कर पा रहा है। इसके चलते हम निर्माण कार्य शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
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-उत्तम कुमार गहलोत, एमडी, सेतु निगम
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सेतु निगम और एनएचएआई के अधिकारी हाईवे का सर्वे कर चुके हैं। पूर्ववर्ती कंपनी की देनदारी सहित कई अन्य मामलों में सेतु निगम की ओर से कार्रवाई चल रही है। सभी रुकावटों को इसी माह निपटा लिया जाएगा। इसके बाद ही सेतु निगम को लेटर ऑफ अवार्ड जारी कर दिया जाएगा।
प्रदीप गुुसाईं, परियोजना प्रबंधक एनएचएआई, देहरादून परिक्षेत्र
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