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तीन दिनों तक अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के बाद अपने मंदिरों में स्थापित हुए देव निशाण

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जोशीमठ। उर्गम घाटी के ल्यारी गांव में आयोजित नंदा-स्वनुल कौथिग के अंतिम दिन आराध्य देवताओं के निशाण अपने-अपने मंदिर में स्थापित किए गए। भारी संख्या में ल्यारी गांव पहुंचे न्यौतेरों (निशाणों के साथ आए भक्तगण) ने देवी-देवताओं को आगामी पांच साल में फिर से नंदा-स्वनुल कौथिग आयोजित करने का वचन दिया। मां नंदा और स्वनुल भी ल्यारी गांव में अपने-अपने मंदिरों में विराजमान हो गई हैं। अपनी आराध्य देवियों से विदा लेते वक्त महिलाएं और ध्याणियां भावुक हो उठीं।
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उर्गम घाटी में 42 साल बाद नंदा-स्वनुल कौथिग का आयोजन हुआ। 21 नवंबर को पल्ला गांव से मां चंडिका, भर्की व उर्गम गांव से भूमियाल, बड़गिंडा से विश्वकर्मा और घंटाकर्ण तथा डुमक गांव से बजीर देवता के निशाण गाजे-बाजे के साथ उर्गम गांव के घंटाकर्ण मंदिर में पहुंचे। यहां से सभी देवी-देवताओं के निशाण ल्यारी गांव में मां नंदा के मंदिर परिसर में इकट्ठा हुए। तीन दिनों तक यहां देवी-देवताओं ने पश्वाओं पर अवतरित होकर नृत्य किया और भक्तों को आशीर्वाद दिया। कौथिग समिति के अध्यक्ष राजेंद्र रावत ने बताया कि अब प्रत्येक पांच साल में कौथिग का आयोजन भव्य रूप से किया जाएगा। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। इस मौके पर पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अनूप नेगी, जोशीमठ ब्लॉक के प्रधान संगठन के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह नेगी, रघुवीर सिंह नेगी, विजय प्रसाद, राकेश नेगी, कुंवर सिंह चौहान और बीएस रावत आदि मौजूद थे।
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