श्रीनगर। मेसर्स आईटीआई (इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज) को 85 लाख के अग्रिम भुगतान मामले में विवि प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की है। विवि के विभिन्न विभागों को कंप्यूटरीकृत करने के लिए उक्त कंपनी को टेंडर के माध्यम से कार्य दिया गया है, जिसके तहत कंपनी को 85 लाख का अग्रिम भुगतान किया गया था। शिक्षणेत्तर कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष ने इस मामले में जांच की मांग की थी।
गढ़वाल विवि को पेपरलेस किए जाने के लिए विवि के सभी विभागों को कंप्यूटरीकृत किया जाना था। इसके लिए विवि प्रशासन ने वर्ष 2015 मे टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से मेसर्स आईटीआई (इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज) को करीब दो करोड़ का काम आवंटित किया था। कंपनी को इंटीग्रेटेड यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम के तहत सभी विभागों को कंप्यूटरीकृत करना था। अनुबंध की शर्तों के अनुसार विवि प्रशासन ने कंपनी को 85 लाख (कुल राशि का 40 फीसदी) का अग्रिम भुगतान भी कर दिया था। विवि के शिक्षणेत्तर कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी ने कंपनी पर अग्रिम भुगतान के बाद कार्य न करने का आरोप लगाया है। भंडारी का कहना है कि कंपनी अग्रिम भुगतान लेने के बाद कार्य करने में रुचि नहीं दिखा रही है। उन्होंने इस संबंध में एमएचआरडी व विवि प्रशासन से शिकायत दर्ज कराई है। भंडारी की शिकायत पर कुलपति प्रो. एससी बागड़ी ने कंपनी को अग्रिम भुगतान किए जाने के मामले में जांच के लिए कमेटी गठित की है। अब उक्त कमेटी कंपनी द्वारा किए गए कार्यों की जांच करेगी। हालांकि शिक्षणेत्तर कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष कंपनी पर कुछ भी कार्य न करने का आरोप लगा रहे हैं। जांच कमेटी में प्रो. एमएमएस रौथाण (संयोजक), प्रो. ओपी गुसाईं व सिस्टम मैनेजर संजीव श्रीवास्तव सदस्य हैं।