श्रीनगर। आईएनओ (अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संगठन), आयुष मंत्रालय भारत सरकार और सूर्या फाउंडेशन की ओर से प्रथम प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाया गया। इस मौके पर बताया गया कि सूर्य की किरणों के संपर्क में रहकर पानी औषधीय हो जाता है। इसके साथ ही प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपेथी) के लाभ बताए गए।
रविवार को चौरास मेें आयोजित कार्यक्रम में पौड़ी व टिहरी जिले के आईएनओ समन्वयक डा. विनोद नौटियाल व डा. रजनी नौटियाल ने बताया कि भारत में पहली बार प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाया जा रहा है। आईएनओ ने आयुष मंत्रालय के सहयोग से 11 से 17 नवंबर तक प्राकृतिक चिकित्सा सप्ताह मनाया। इस दौरान श्रीनगर, श्रीकोट, चौरास, मढ़ी व कीर्तिनगर में शिविर लगाए। समन्वयकों ने कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राओं को पंचमहाभूत (थल, नभ, जल, वायु व अग्नि) से स्वस्थ रहने के तरीके बताए गए। कहा गया कि सूर्य की किरणों से उपचार किया जा सकता है। सूर्य की किरणों को विभिन्न रंग की कांच की बोतलों से गुजारा जाता है। दो-तीन दिन तक सूर्य की किरणों के संपर्क में रहकर पानी औषधीय हो जाता है। मसलन लाल रंग की बोतल का पानी गठिया व निम्न रक्तचाप में उपयोगी है। उन्होंने बच्चों और बुजुर्गों की मालिश के तरीके भी बताए। इसके अलावा बैठकर पानी पीने और पानी के साथ बालू भक्षण के लाभ भी बताए गए।