गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम परिसर स्थित आदि केदारेश्वर मंदिर के कपाट शनिवार को भोग लगाने के बाद विधि-विधान से शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। बदरीनाथ के रावल ने आदि केदारेश्वर मंदिर में इस वर्ष की अंतिम पूजा की। इस दौरान माणा और बामणी गांव के ग्रामीणों के साथ ही 1077 तीर्थयात्री भी शामिल हुए।
20 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होंगे। इसके तहत कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हुईं। शुक्रवार को बदरीनाथ धाम परिसर स्थित गणेश मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए। शनिवार को सुबह पांच बजे आदि केदारेश्वर मंदिर को तीर्थयात्रियों के दर्शनार्थ खोला गया। इसी दौरान बदरीनाथ की धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान बदरीनाथ की महाभिषेक पूजा शुरू हुई। बदरीनाथ को भोग लगाने के बाद धाम के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी और धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल सहित बदरीनाथ के वेदपाठियों ने आदि केदारेश्वर भगवान की अन्नकूट पूजा की। इसके बाद अपराह्न दो बजे विधि विधान व पूजा-अर्चना के साथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।