ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए केवल छह अनुयायी ही पहुंचे, जबकि परिवार और मातृ सदन से कोई भी नहीं पहुंचा। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेश पर एम्स प्रशासन दस रविवार तक स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को दर्शनार्थ रखेगा। अविरल गंगा के लिए कठोर कानून बनाने की मांग को लेकर 111 दिन से आंदोलनरत स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के गत 11 अक्तूबर को देहावसान के बाद पार्थिव शरीर को एम्स में रखा गया है। वे अपना शरीर एम्स को दान कर गए थे। देहावसान के बाद से ही अनुयायी इस बात पर अड़े थे कि परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार के कुछ अनुष्ठान करने के लिए स्वामी सानंद का पार्थिव शरीर उन्हें सौंपा जाए।
तब एम्स प्रशासन के सहमत नहीं होने पर एडवोकेट विजय वर्मा ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर कोर्ट ने पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए दस रविवार तक का समय दिया है। जिस पर 4 नवंबर को करीब दो दर्जन अनुयायी एम्स पहुंचे थे। तैयारियां न होने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ा। क्षुब्ध याचिकाकर्ता एम्स प्रशासन के खिलाफ कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करने के प्रयास में थे। इसी बीच एम्स प्रशासन ने प्रेसवार्ता कर दर्शन की व्यवस्था का खुलासा कर दिया। रविवार को स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर के दर्शन कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली थीं।
इसके लिए एनाटमी विभाग के सामने ही पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। यहां कुर्सियां भी रखवा दी गई थीं, जिससे दर्शनार्थी 10-10 की संख्या में जा सकें और बचे हुए लोगों को प्रतीक्षा में कोई असुविधा न हो। रविवार को अपराह्न 1:45 बजे से अनुयायी आने लगे। पहले दिन दर्शन करने के लिए श्यामपुर, गुमानीवाला, जौलीग्रांट, शिवाजीनगर, रानीपोखरी क्षेत्र से कुल छह अनुयायी पहुंचे। इनमें सुमित धीमान, अमित धीमान, संदीप जायसवाल, ओमप्रकाश, सोमपाल, सतेंद्र शामिल रहे।
फिक्रमंदों की दिक्कतें अब भी बरकरार
ऋषिकेश। एम्स में दर्शन की सुविधा शुरू होने के बाद मातृ सदन से कोई आगंतुक दिखाई नहीं पड़ा। गौरतलब है कि मातृ सदन की ओर से स्वामी दयानंद ने स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को सार्वजनिक दर्शन के लिए रखने का प्रस्ताव सबसे जोरशोर से उठाया था। रविवार को जब उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो फोन नहीं उठा। उधर, याचिकाकर्ता विजय वर्मा अब भी असंतुष्ट हैं। उनका तर्क है कि दस की संख्या में अधिकतम 50 लोगों को दर्शन करवाना कहीं से भी जायज नहीं है। हम दोबारा कोर्ट में मसले को उठाएंगे।