श्रीनगर। एनआईटी के स्थायी परिसर निर्माण, शुद्ध पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए प्रजम पुन: जन आंदोलन छिड़ेगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार के आश्वासन पर छह माह के लिए आंदोलन स्थगित किया गया था। निर्धारित समयावधि बीतने के बाद भी उक्त मांगों पर कोई कार्रवाई न होने के चलते पुन: आंदोलन का निर्णय लिया गया है। इसकी रणनीति जल्दी तय की जाएगी। साथ ही तय किया गया कि 21 नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी मेले के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री से मांगों के संबंध में वार्ता की जाएगी।
शनिवार को श्रीयंत्र टापू कांड की बरसी पर प्रगतिशील जनमंच के बैनर तले स्थानीय निवासियों की बैठक हुई। इस अवसर पर सरकार की सुस्त चाल पर रोष जताया गया। कहा गया कि सरकार किसी भी मुद्दे को नहीं सुलझा पा रही है। 18 साल से राजधानी का मुद्दा लटकाया हुआ है। इसी प्रकार आठ साल से एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी कैंपस का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। कहा कि प्रदेश का पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज बुरे दौर से गुजर रहा है। वहीं पौड़ी, श्रीनगर और श्रीकोट के लिए वादे के मुताबिक वैकल्पिक पेयजल योजना का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने रोष जताया कि स्थानीय विधायक व उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत के आश्वासन पर 31 मई को धरना-प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया था, लेकिन उक्त मुद्दों पर कोई पहल नहीं दिख रही। इसलिए पुन: आंदोलन छेड़ा जाएगा। बैठक में मंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी, कांग्रेस नगर कमेटी अध्यक्ष भूपेंद्र पुंडीर, मुन्नी पांडेय, संपति गुंसाई, प्रेम दत्त नौटियाल, नवीन नौटियाल, चतर सिह रावत, सुरजीत बिष्ट और अनीता रावत आदि मौजूद थे।