प्रमोद सेमवाल
गोपेश्वर। चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष पद के उपचुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को झटका लगा है। पार्टी अपने सदस्यों को ही नहीं संभाल पाई और भितरघात के चलते उसे जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा।
निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मुन्नी देवी के थराली विधायक चुने जाने के बाद से ही अध्यक्ष की कुर्सी पर नए चेहरे की ताजपोशी की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी, लेकिन मुन्नी देवी ने तीन माह तक भी विधायक की शपथ नहीं ली और विधायक के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर भी बनीं रही। इससे भाजपा में ही असंतोष पैदा हो गया। पार्टी के जिला पंचायत सदस्यों ने कांग्रेस समर्थित सदस्यों के साथ जिला पंचायत की बैठक का बहिष्कार ही नहीं किया बल्कि इसी माह अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तक ले आए। इससे भाजपा सदस्यों के बीच असंतोष खुलकर सामने आ गया। हालांकि इसके तत्काल बाद सरकार ने इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा भी कर दी।
भाजपा ने अध्यक्ष पद के लिए भागीरथी कुंजवाल को अपना प्रत्याशी घोषित किया, जबकि कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित न कर निर्दलीय प्रत्याशी रमवती देवी को अपना समर्थन दिया। वर्ष 2014 संपन्न जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस के सत्तारूढ़ होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी मुन्नी देवी ने जीत हासिल की। तब उन्हें 15 मत प्राप्त हुए थे, जबकि कांग्रेस को 11 मत मिले और एक मत निरस्त हो गया था। अब राज्य और केंद्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद भाजपा मात्र 11 सदस्यों को ही अपने पाले में ला सकी। इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा अपने सदस्यों की नाराजगी को दूर नहीं कर सकी।
कुछ सदस्यों ने भितरघात किया है, जिसका परिणाम यह रहा कि हमें अध्यक्ष की सीट गंवानी पड़ी। संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ चुनाव की समीक्षा की जाएगी।
मोहन प्रसाद थपलियाल, जिलाध्यक्ष, भाजपा, चमोली
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कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के कारण हमें जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट गंवानी पड़ी है। जिला संगठन में एकजुटता नहीं है, जिससे हमें हार का सामना करना पड़ा है।
-तारेंद्र थपलियाल, भाजपा मोर्चा प्रभारी, चमोली