प्रमोद सेमवाल
गोपेश्वर। उत्तराखंड के चमोली जिले से लगे चीन सीमा क्षेत्र में भारत की ओर से सड़क नेटवर्क के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यहां इन दिनों चट्टान काटकर सड़क निर्माण कार्य जोर शोर से चल रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद भी सीमा क्षेत्र में बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के जवान और मजदूर सड़क निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं। बीआरओ के अधिकारियों ने वर्ष 2020 तक भारत की अंतिम सेना चौकी रिमखिम तक सड़क पहुंचाने का दावा किया है। इन दिनों गिर्थी से सुमना (7 किमी) तक सड़क निर्माण कार्य चल रहा है।
जोशीमठ-मलारी-सुमना (85 किमी) मोटर मार्ग सामरिक दृष्टि से बेहत संवेदनशील है। सुमना समुद्रतल से 3460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से करीब 20 किमी की दूरी पर बाड़ाहोती चारागाह मौजूद है। इस सीमा क्षेत्र में चीन रेल मार्ग तक का विस्तार कर चुका है। बार-बार भारत में घुसपैठ की कोशिश कर रहा है, जिसे देखते हुए भारत भी यहां सड़क विस्तार पर विशेष जोर दे रहा है। जोशीमठ से मलारी (62 किमी) सड़क बेहतर स्थिति में है। यहां से आगे चट्टानी भाग होने के कारण बीआरओ को सड़क बनाने में खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बीआरओ यहां मशीन और मेन पावर के जरिए चट्टानी भाग को काटकर सड़क बनाने में लगा हुआ है। देश के रक्षा मंत्रालय की ओर से लगातार सड़क निर्माण की मॉनेटरिंग की जा रही है।
बाड़होती है विवादित चारागाह
चमोली जिले में भारत और चीन के बीच बाड़ाहोती क्षेत्र 80 वर्ग किलोमीटर में फैला चारागाह है। दोनों देश इस क्षेत्र पर अपना दावा करते हैं। यही वजह है कि चीन बार-बार यहां सीमा उल्लंघन करता है। अब भारत इस सीमा क्षेत्र को सड़क नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दे रहा है। बाड़ाहोती एरिया के समीप रिमखिम में हेलीपैड स्थित है। वर्ष 2020 तक इस हेलीपेड को भी सड़क से जोड़ने का लक्ष्य है।
चीन सीमा क्षेत्र को जोडने वाली नीती और माणा घाटी में वर्ष 2020 तक सड़क निर्माण कार्य पूर्ण किया जाना है। सुमना तक सड़क निर्माण कार्य पूर्ण कर डामरीकरण की तैयारी की जा रही है, जबकि माणा घाटी में वर्ष 2019 तक माणा से रत्ताकोना (36 किमी) तक सड़क निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। वर्ष 2020 तक अंतिम सेना चौकी रिमखिम और माणापास तक सड़क पहुंचा दी जाएगी।
एसएस मक्कर, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ, चमोली