देवप्रयाग/रुद्रप्रयाग। भगवान राम की तपस्थली में देवप्रयाग में चल रही रामलीला की पांचवीं संध्या को राम वनवास के मार्मिक दृश्यों से दर्शक भावुक हो उठे। इससे पूर्व मंथरा के कैकेयी के कान भरने, कैकेयी के कोप भवन में जाने व राजा दशरथ से दो वचनों को पूरा करने का मंचन किया गया। राम (मोरारीलाल तिवाड़ी), दशरथ (समीर पंचपुरी), कैकेयी (ऋत्विक बडोला) और मंथरा (दिवाकर ठाकुर) ने भावपूर्ण अभिनय किया। वसंत अलखनिया, पूर्ण प्रकाश कोटियाल व सतीश पुरोहित ने संगीत की प्रस्तुति दी।
उधर, रुद्रप्रयाग में आयोजित रामलीला के प्रथम दृश्य में लंका पर आक्रमण करने से पूर्व श्रीराम द्वारा समुद्र तट पर भगवान शिव की स्तुति कर युद्ध में विजयी का आशीष मांगते है। अंगद भगवान का शांति दूत बनकर लंकापति राजा रावण के दरबार में पहुंचकर शांति का प्रस्ताव देते हुए माता सीता को ससम्मान राम को लौटाने की अपील करता है, लेकिन रावण नहीं मानता है। अंगद कहाता है कि यदि रावण के दरबार में कोई भी उसका पैर हिला देगा, तो श्रीराम युद्ध में हार स्वीकार कर लेंगे। लेकिन उसका पैर नहीं हिला पता है। वहीं शक्ति सांस्कृतिक ट्रस्ट की ओर से पांच नवंबर से जिला मुख्यालय के नए बस अड्डे पर रामलीला का मंचन किया जा रहा है। ट्रस्ट के नवीन सेमवाल ने यह जानकारी दी।