ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में सोमवार को ब्रेस्ट कैंसर जन जागरूकता माह के तहत अभियान चलाया गया। इस अवसर पर अस्पताल परिसर में नुक्कड़ नाटक, पोस्टर व क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। इसके अलावा आस्था पथ पर वॉक के जरिए लोगों को स्तन कैंसर के लक्षण व रोकथाम के उपाय बताए गए।
एम्स परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर डॉ. रविकांत ने कहा कि महिलाएं स्तन कैंसर के प्रति सचेत नहीं हैं। एम्स में इंट्रीग्रेटेड ब्रेस्ट कैंसर क्लीनिक खासतौर पर स्तन कैंसर से ग्रसित महिलाओं के उपचार के लिए संचालित किया जा रहा है। सोमवार व बुधवार को संचालित होने वाले इस क्लीनिक में एक ही बार में सभी तरह की टेस्ट की सुविधाएं उपलब्ध हैं। नर्सिंग कॉलेज के डीन डॉ. सुरेश कुमार शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर वसंता कल्याणी व रुचिका रानी ने बताया कि भारत में हर आठ महिलाओं में से एक महिला ब्रेस्ट कैंसर से ग्रस्त है। जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं व युवतियां अपनी समस्याएं चिकित्सक को नहीं बतातीं। इसके चलते स्तन कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं इस दौरान लोगों को ब्रेस्ट कैंसर की जांच के तौर तरीके बताए गए। इस अवसर पर क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से आम लोगों से सवाल पूछे गए व सही जवाब देने वालों को सम्मानित किया गया। उधर, निदेशक प्रोफेसर रवि कांत की अगुवाई में संस्थान के चिकित्सकों व विद्यार्थियों ने आस्था पथ पर हाथों में तख्तियां लेकर लोगों को जागरूक किया।
तीन महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि
ऋषिकेश। ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान के तहत नर्सिंग की छात्राओं प्रसूना, जैली, हिमांशी, लीजू ने महिलाओं की स्क्रीनिंग की। डॉ. रुचिका रानी ने बताया कि इस दौरान करीब 20 महिलाओं की जांच की गई, जिनमें से तीन महिलाओं के स्तन में गांठ पाई गई हैं। उन्हें इंट्रीग्रेटेड ब्रेस्ट कैंसर क्लीनिक के लिए रेफर किया गया है। आठ महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की आशंका है जिन्हें मेमोग्राफी कराने का सुझाव दिया गया है।