गोपेश्वर। आरक्षित वन क्षेत्र लाटूतोली तोक में टेंट लगाकर रह रहे झलिया गांव के 12 आपदा प्रभावित ग्रामीणों को बदरीनाथ वन प्रभाग ने भूमि खाली करने का नोटिस थमा दिया है। इससे प्रभावितों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रभावितों ने डीएम को ज्ञापन लेकर स्थायी विस्थापन की मांग उठाई।
झलिया गांव में 36 परिवार रहते हैं। वर्ष 2011 में गांव के पीछे चट्टान से भूस्खलन शुरू हो गया था। तब से ग्रामीण पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। चालू वर्ष के अगस्त माह में भारी बारिश के दौरान चट्टान से हुए भूस्खलन के कारण 12 मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। साथ ही कृषि योग्य भूमि भी मलबे में दब गई थी। तब प्रशासन ने आपदा प्रभावितों को लाटूतोली तोक में टेंट लगाकर रहने की व्यवस्था की थी, लेकिन अब बदरीनाथ वन प्रभाग ने ग्रामीणों को आरक्षित वन क्षेत्र का हवाला देकर भूमि खाली करने का नोटिस थमा दिया है। शुक्रवार को ग्राम प्रधान बसंती देवी, पूर्व प्रधान भागचंद्र सिंह दानू, उपप्रधान हुकम सिंह, राकेश, शेर सिंह, हरेंद्र सिंह, खीम सिंह, बचन सिंह, आनंदी देवी और सूरमा देवी ने डीएम कार्यालय में दिए ज्ञापन में लाटूतोली तोक में ही प्रभावितों के स्थायी पुनर्वास करने की मांग उठाई। डीएम स्वाति एस भदौरिया का कहना है कि वन आरक्षित क्षेत्र की भूमि से अभी विस्थापितों को हटाया जा रहा है। इन्हें जल्द ही कहीं दूसरी जगह पर विस्थापित किया जाएगा।
पर्यटन मंत्री ने दिए प्रभावितों को यथावत रखने के निर्देश
गोपेश्वर। पिंडारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दर्शन दानू की मांग पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने चमोली डीएम स्वाति एस भदौरिया को भेजे पत्र में झलिया गांव के आपदा प्रभावितों को लाटूतोली तोक में यथावत रखने के लिए कहा है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि झलिया गांव पूर्ण रूप से आपदाग्रस्त है। अब यहां ग्रामीणों का क्षतिग्रस्त मकानों में रहना संभव नहीं है। लिहाजा प्रभावितों को लाटूतोली तोक में ही यथावत रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।