ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
चिपको आंदोलन की जननी गौरा देवी की 93वीं जयंती के अवसर पर बृहस्पतिवार को नि:शुल्क शिक्षण संस्थान उड़ान स्कूल में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बच्चों को गौरा देवी के जीवन संघर्ष और पहाड़ की महिलाओं के साथ मिलकर शुरू किए गए चिपको आंदोलन की जानकारी दी गई।
उड़ान स्कूल के निदेशक डॉ. राजे नेगी ने बताया कि गौरा देवी ने पर्यावरण संरक्षण और जंगलों का अवैध दोहन रोकने के लिए चिपको आंदोलन के जरिए देश को पूरी दुनिया में पहचान दिलाई थी। गौरा देवी ने चिपको आंदोलन जोशीमठ तहसील के सीमावर्ती रैंणी गांव से शुरू किया था। इसके बाद आंदोलन एक दशक में पूरे उत्तराखंड में फैल गया था और आंदोलन से बड़ी संख्या में महिलाएं जुड़ गईं। आंदोलन के तहत औरतें पेड़ों से चिपक कर जंगल काटने वाले ठेकेदार और मजदूरों का विरोध करती थीं। इसके अलावा महिलाएं जंगल जाने के रास्तों पर पहरेदारी भी करती थीं। कार्यक्रम में मीनाक्षी राणा, प्रिया क्षेत्री, रोशनी भारद्वाज, दीपिका पंत, उत्तम असवाल, अंकित नेथानी, आशुतोष कुड़ियाल आदि मौजूद रहे।
गौरा देवी से बनीं चिपको वूमन फ्राम इंडिया
चिपको आंदोलन ने वन प्रेमियों और वैज्ञानिकों के अलावा सरकार का भी ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया। इस प्रकार से पर्यावरण के प्रति अतुलित प्रेम का प्रदर्शन करने और उसकी रक्षा के लिए अपनी जान को भी ताख पर रखकर गौरा देवी ने जो किया उसने उन्हें रैंणी गांव की गौरा देवी से चिपको वूमेन फ्राम इंडिया बना दिया।