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छोटी सरकार से छोटे दलों ने किया किनारा

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कर्णप्रयाग। विधानसभा, लोकसभा सहित अन्य बड़े चुनावों में चुनाव मैदान में उतरने वाले कई दल रण से दूर रहे। स्थिति यह है कि विधानसभा में उपस्थिति दर्ज करने वाले सपा और आप यहां एक भी प्रत्याशी नहीं उतार पाई है। जिले के नौ नगर निकाय में से बसपा तीन, उक्रांद एक और भाकपा माले एक निकाय में अध्यक्ष पद पर मैदान में हैं, जबकि सभासदों में भाजपा-कांग्रेस को छोड़ किसी दल का उम्मीदवार नहीं है।
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उत्तराखंड आंदोलन और गैरसैंण स्थायी राजधानी की पुरजोर पैरवी करने वाले एक मात्र क्षेत्रीय दल उक्रांद क्षेत्र की गौचर, गोपेश्वर और कर्णप्रयाग नगर पालिका के साथ थराली, पीपलकोटी, पोखरी, नंदप्रयाग तथा गैरसैंण नगर पंचायत में अध्यक्ष सहित सभासद के किसी भी उम्मीदवार पर प्रत्याशी नहीं उतार पाया। केवल जोशीमठ में अरुण कुमार को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाकर उक्रांद ने इतिश्री कर ली। उक्रांद ने कर्णप्रयाग विधानसभा चुनावों में लगातार उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्ष 2012 के विधानसभा में चतुर सिंह और वर्ष 2017 में बलवंत सिंह नेगी को टिकट दिया था। वहीं बसपा भी रण में नहीं दिखाई दे रही है, जबकि बसपा ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों में धूमी लाल और वर्ष 2017 में ज्योति कनवासी को उम्मीदवार बनाया था। निकाय चुनाव में बसपा केवल गौचर, पोखरी और जोशीमठ तक सिमट गई है। गौचर में बसपा ने मंजू शाह को, पोखरी में महिपाल और जोशीमठ में ममता को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया है। लगातार संगठन के विस्तार का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी भी निकाय चुनावों में प्रत्याशी नहीं उतार पाई है। उक्रांद के केंद्रीय प्रवक्ता अर्जुन सिंह रावत का कहना है कि दल लगातार पहाड़ी क्षेत्रों में भी पैठ बना रहा है और भाजपा-कांग्रेस का विकल्प बन रहा है। अभी पार्टी का लोकसभा और पंचायत चुनावों पर फोकस है, जबकि पार्टी के निर्देशानुसार निकाय चुनावों में वैचारिक समानता वाले निर्दलीय और अन्य के साथ समर्थन देकर चुनाव लड़ा जा रहा है।
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