श्रीनगर। केंद्रीय विवि बनने के बाद पहली बार आयोजित हो रहे दीक्षांत समारोह में गढ़वाल विवि मानद उपाधि वितरित नहीं करेगा। मानद उपाधि वितरित किए जाने के लिए नियमानुसार किसी भी केंद्रीय विवि को तीन माह पूर्व एमएचआरडी से स्वीकृति लेनी होती है, लेकिन समय की कमी के चलते विवि कई औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पाया है।
एक दिसंबर को गढ़वाल केंद्रीय विवि का दीक्षांत समारोह प्रस्तावित है। दीक्षांत समारोह के आयोजन के लिए विवि युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू किए जाने की बात कह रहा है, लेकिन समय की कमी के चलते विवि कई औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पाया है। ऐसे में विवि एक दिसंबर को आयोजित हो रहे दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि वितरित करने पर कोई विचार नहीं कर पाया है। विवि के अधिकारियों के अनुसार मानद उपाधि के लिए किसी भी केंद्रीय विवि को तीन माह पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सूचित करना पड़ता है, जिसके तहत विवि मानद उपाधि दिए जाने के लिए नाम, उनकी उपलब्धि व समाज में उनके महत्वपूर्ण कार्यों से भी मंत्रालय को अवगत कराता है। मंत्रालय से स्वीकृति के बाद ही मानद उपाधि दी जाती है। गढ़वाल विवि के दीक्षांत समारोह संयोजक प्रो. एआर नौटियाल का कहना है कि मानद उपाधि उपाधि दिए जाने के बारे में कोई विचार नहीं किया गया है। समय की कमी है, इसलिए पूरा ध्यान आयोजन को लेकर है। दीक्षांत समारोह की तैयारियों को लेकर मंगलवार (आज) आयोजन समिति की बैठक आयोजित की जाएगी। समिति के संयोजक प्रो. एआर नौटियाल ने कहा कि बैठक में तैयारियों के अंतिम रूप को लेकर चर्चा की जाएगी।
कुलाधिपति दे सकते हैं मानद उपाधि
श्रीनगर। केंद्रीय विवि के कुलाधिपति (चांसलर) अपने विवेकाधिकार के तहत मानद उपाधि दे सकते हैं। इसके लिए तीन माह पूर्व मंत्रालय को सूचित किए जाने की बाध्यता नहीं है। गढ़वाल विवि के कुलाधिपति के पद पर पूर्व आईएएस योगेंद्र नारायण को नियुक्त किया गया है। कुलाधिपति चाहें तो मानद उपाधि दे सकते हैं।
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राजीव