श्रीनगर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) उत्तराखंड के छात्रों की कैंपस शिफ्टिंग की मांग को छात्र संगठन आइसा ने सुनियोजित षड्यंत्र बताया है। संगठन का कहना है कि आंदोलन की आड़ में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का पहाड़ से पलायन का छुपा एजेंडा काम कर रहा है। क्योंकि छात्र आंदोलनों में सुविधाओं की मांग होती है, न कि कैंपस शिफ्टिंग की मांग।
तीन अक्तूबर को बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर एक बेकाबू कार ने एनआईटी की दो छात्राओं को टक्कर मार दी थी। इस घटना से आक्रोशित संस्थान के छात्र-छात्राएं चार अक्तूबर से कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे है। छात्र-छात्राएं पिछले 17 दिन से सुविधाजनक अस्थायी कैंपस में शिफ्टिंग, स्थायी कैंपस का निर्माण और सुविधाओं की मांग के लिए धरना दे रहे हैं। वहीं, गढ़वाल विवि छात्र संघ उपाध्यक्ष अंकित उछोली, आइसा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अतुल सती, नगर इकाई अध्यक्ष शिवानी पांडेय और सचिव कपूर सिंह ने प्रेस को बयान जारी करते हुए कहा कि शिफ्टिंग की मांग के पीछे पहाड़ विरोधियों का छुपा एजेंडा काम कर रहा है। राष्ट्रीय महत्व के संस्थान को कुछ लोग पहाड़ में नहीं बनने देना चाहते हैं, जिसके लिए छात्रों को मोहरा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आइसा एनआईटी के छात्रों की स्थायी कैंपस निर्माण, फैकल्टी, हॉस्टल सुविधाओं और बेहतर लैब स्थापित करने की मांग का समर्थन करती है, लेकिन कैंपस शिफ्टिंग की माग को हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।