गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम के कपाट 20 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। शुक्रवार को बदरीनाथ धाम के परिक्रमा मंडप में बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल और वेदपाठियों ने पंचांग देखकर धाम के कपाट बंद होने की तिथि तय की। बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने तिथि की घोषणा की। बीते वर्ष धाम के कपाट 19 नवंबर को बंद हुए थे।
शुक्रवार को पूर्वाह्न ग्यारह बजे बदरीनाथ की अभिषेक पूजा के बाद धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, अपर धर्माधिकारी सत्यप्रसाद चमोला और वेदपाठियों ने पंचांग गणना की। धर्माधिकारी ने 20 नवंबर की तिथि को शुभ बताते हुए रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी से चर्चा की। इसके बाद रावल ने 20 नवंबर को अपराह्न 3 बजकर 21 मिनट पर बदरीनाथ के कपाट बंद होने की घोषणा की। परिसर में मौजूद सैकड़ों भक्तों ने जय बदरीनाथ के जयकारे लगाए। इस मौके पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, मंदिर अधिकारी मोहन प्रसाद सती, दफैदार कृपाल सिंह सनवाल, बलदेव मेहता, किशोर पंवार, राजेश मेहता के साथ ही बामणी गांव के हक-हकूकधारी ग्रामीण मौजूद थे।
अगले साल की यात्रा के लिए भंडारे की जिम्मेदारी सौंपी
गोपेश्वर। अगले साल 2019 में छह माह तक बदरीनाथ के भंडारे का जिम्मा नवीन भंडारी, संदीप सनवाल, दीपक सनवाल और लोकेश पंवार (सभी पांडुकेश्वर निवासी) को सौंपा गया। बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह ने चारों भंडारियों के सिर पर पगड़ी बांधकर अगले साल की तीर्थयात्रा में बदरीनाथ के भंडार का जिम्मा सौंपा। बदरीनाथ के भंडार की जिम्मेदारी मेहता, भंडारी और कम्दी थोक के हक-हकूकधारियों को सौंपी जाती है।
बदरीनाथ के कपाट बंद होने से पूर्व ये प्रक्रियाएं होंगी संपन्न-
16 नवंबर- गणेश व महाभिषेक पूजा के बाद शाम सात बजे गणेश मंदिर के कपाट बंद होंगे।
17 नवंबर- मध्याह्न में आदि केदारेश्वर मंदिर के कपाट होंगे बंद।
18 नवंबर- धाम में वेद ऋचाएं बंद, गुप्त मंत्रों का जाप।
19 नवंबर- लक्ष्मी मंदिर में पूजा व कढ़ाई भोग का आयोजन।
20 नवंबर-माता लक्ष्मी का बदरीनाथ गर्भगृह में प्रवेश और अपराह्न 3 बजकर 21 मिनट पर बदरीनाथ के कपाट बंद।