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राम मंदिर निर्माण को निकाली बाइक रैली

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ब्यूरो/अमर उजाला
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विकासनगर। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग पर अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने रविवार को सेलाकुई से लेकर विकासनगर तक बाइक रैली निकाली। राष्ट्रीय बजंरग दल के प्रदेश अध्यक्ष अमित तोमर के नेतृत्व में सेलाकुई स्थित ज्वाला जी मंदिर से शुरू हुई यह बाइक रैली हरिपुर सेलाकुई, रामपुर, सहसपुर, जस्सोवाला, हरबर्टपुर, तहसील चौक होते हुए विकासनगर पहुंची। जहां कार्यकर्ताओं ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग पर विकासनगर बाजार में पद यात्रा निकाली।
प्रदेश अध्यक्ष अमित तोमर ने 21 अक्तूबर को आयोजित अयोध्या कूच को सफल बनाने का आह्वान किया। कहा केंद्र सरकार अब तक राम मंदिर निर्माण पर कोई फैसला नहीं ले सकी है। भाजपा राम मंदिर के नाम पर राजनीति करती है। जब तक राम मंदिर नहीं बन जाता तब तक अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल चुप नहीं बैठने वाला। कहा 21 अक्तूबर को हजारों की संख्या में कारसेवक डॉ. प्रवीन भाई तोगड़िया के नेतृत्व में लखनऊ से अयोध्या कूच करेंगे। अकेले उत्तराखंड से 15 हजार से अधिक कार्यकर्ता इस कूच में प्रतिभाग करेंगे। कहा 2019 तक राम मंदिर नहीं बनने पर केंद्र सरकार को इसका हर्जाना भुगतना पड़ेगा।
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रैली में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष अमित अग्रवाल, राष्ट्रीय बजरंग दल के जिलाध्यक्ष सतपाल धानिया, अमित बिष्ट, सेलाकुई नगर अध्यक्ष अमित अग्रवाल, सुधीर रावत, रवींद्र भट्ट, अमन सेतिया, संजय ठाकुर, डॉ. राजाराम, संगीता अग्रवाल, टीना धीमान, मधु राघव, अमित नेगी, प्रदीप कुमार, अभिषेक मैठाणी, श्रीपाल, अनिल कुमार, शिवकुमार प्रजापति, राजीव श्रीवास्तव, अरविंद शर्मा, गुरबचन सिंह, कुंवरपाल, मदन सिंह, अरविंद भट्ट, नवीन भट्ट, रजनीश कांबोज, भगवान सिंह, आदित्य रावत, विपिन कुमार, शिवम आदि मौजूद रहे।
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स्वामी सानंद को दी श्रद्धांजलि
सेलाकुई। रैली से पूर्व अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ज्वाला जी मंदिर में गंगापुत्र स्वामी सानंद को श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष अमित तोमर ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की लापरवाही के चलते ही स्वामी सानंद को अपने प्राण त्यागने को मजबूर होना पड़ा। बीते चार साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी सानंद के किसी भी पत्र का जवाब देना जरूरी नहीं समझा। केंद्र सरकार नमामि गंगे के नाम पर अब तक 20 हजार करोड़ रुपये पानी की तरह बहा चुकी है लेकिन आज तक गंगा की एक बूंद भी पीने और नहाने योग्य नहीं बन सकी है।
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