कर्णप्रयाग। चार धाम यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों में शामिल कर्णप्रयाग ब्लाक में 28 से अधिक गांव आज भी सड़क सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। यहां सड़कें स्वीकृति, सर्वे, वन अधिनियम सहित कई मामलों में लटकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन निर्माण के लिए सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।
ब्लाक के धनपुर, शंकड, एंड, बसक्वाली, घतौड़ा, ऋषिवाड़ी, ग्वालखेत, सेरागाड़, स्यान, कुनेथ सहित कई गांव दशकों से सड़क सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। धनुपर और शंकड के ग्रामीण पांच किमी से अधिक पैदल दूरी नापने को मजबूर हैं, जबकि अन्य गांवों के ग्रामीण 3 से 5 किमी की दूरी पैदल तय करते हैं। शंकड के सते सिंह, डोंठला के नरेंद्र सिंह बिष्ट, प्रधान अनीता देवी, सैंज के महावीर सिंह, हरकोटी के देवी प्रसाद, घतौड़ा के राकेश कोटियाल, ज्येष्ठ उपप्रमुख गौतम मिंगवाल आदि ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए विभाग और शासन केवल आश्वासन दे रहा है। विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि अधिकतर सड़कें वन अधिनियम में है, जिनकी कमियां दूर कर स्वीकृति के प्रयास किए जा रहे हैं। पीएमजीएसवाई में कई सड़कों को स्वीकृत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही हर गांव को सड़क से जोड़ा जाएगा।
सड़क और पुल के लिए 16 को धरने की चेतावनी
कर्णप्रयाग। सड़क और पुल निर्माण की मांग के लिए सेरागाड़ सड़क निर्माण संघर्ष समिति 16 अक्तूबर को जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करेगी। समिति के अध्यक्ष किशोर प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि तीन साल से सेरागाड़ के लिए पुल और सड़क निर्माण का काम चल रहा है, लेकिन निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ है। सड़क और पुल नहीं बनने से लोगों को छह किमी पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है।