ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
शुक्रवार सुबह से ही एम्स में स्वामी सानंद के अनुयायियों और परिजनों का जमावड़ा लगा रहा। उम्मीद की जा रही थी कि पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए सार्वजनिक किया जाएगा। एम्स प्रशासन पूरे मामले पर फूंक फूंककर कदम उठाता रहा। कई बार मुलाकात और मांग पर अंतिम दर्शन का समय भी विभिन्न माध्यमों से जारी किया गया, लेकिन सब अफवाह साबित हुई। अंतत: संस्थान के डायरेक्टर प्रो. डॉ. रविकांत ने स्पष्ट किया कि अंतिम संस्कार या सार्वजनिक दर्शन के लिए पार्थिव शरीर बाहर नहीं लाया जाएगा।
शुक्रवार सुबह एम्स पहुंचे राजेंद्र सिंह एम्स डायरेक्टर से मिले। उन्होंने पार्थिव शरीर को तीन दिन के लिए हरिद्वार ले जाने की इजाजत मांगी। इसके बाद स्वामी सानंद के भतीजे अभिषेक स्वरूप, भाभी शकुंतला, पारिवारिक सदस्य मनोज अग्रवाल सहित करीब दर्जन भर लोगों ने भी डायरेक्टर से मिलकर स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन का अनुरोध किया। काफी देर तक इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया। औपचारिक रूप से पहले 12 बजे फिर दोपहर एक बजे अंतिम दर्शन करवाने का भरोसा दिया गया। फिलहाल अनिश्चितता के माहौल में अनुयायी और परिजन परिसर में ही भटकते रहे। आखिरकार प्रो. रविकांत ने कहा कि एम्स कोई फंक्शन की जगह नहीं है। जब व्यक्ति ऊपर चला गया तो सब छूट गया। परिवार को यदि अंतिम संस्कार करना है तो वो बाहर करें। स्वामी सानंद के पत्र के मुताबिक उनका पार्थिव शरीर अब एम्स का है। इससे पहले एम्स पीआरओ ने भी बयान दिया कि संस्थान में करीब तीन सेमिनार चल रहे हैं जिनमें देश विदेश के लोग शामिल हुए हैं। ऐसे में सार्वजनिक दर्शन जैसे कार्यक्रम से परिसर का माहौल बिगड़ेगा। इसलिए पार्थिव शरीर बाहर न रखने का निर्णय लिया गया है। प्रो. जीडी अग्रवाल के लिखित संकल्प के मुताबिक उनके शव का अब मेडिकल शोध में उपयोग होगा।