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पांच साल से अस्पताल में नहीं रेडियोलॉजिस्ट

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- बंद कमरे में धूल फांक रही मशीन, गर्भवती महिलाओं को हो रही दिक्कत
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- लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए जाना पड़ता है 40 किमी दूर विकासनगर
अमर उजाला ब्यूरो
साहिया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साहिया में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं होने से लोगों को अल्ट्रासाउंड सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बंद कमरे में अल्ट्रासाउंड मशीन
धूम फांक रही है। लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए 40 किमी दूर विकासनगर की दौड़ लगानी पड़ रही है। सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना गर्भवती महिलाओं को उठाना पड़ता है। बीते पांच साल से अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त पड़ा है।
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अस्पताल चालीस से अधिक गांवों का केंद्र बिंदु है। जहां दूर-दराज से लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में लोगों को घर के पास ही बेहतर स्वास्थ्य सुुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2013 में लाखों रुपये की लागत से अल्ट्रासाउंड मशीन लगाई गई थी। लेकिन महज एक वर्ष बाद ही यहां तैनात रेडियोलॉजिस्ट का अन्यत्र स्थानांतरण कर दिया गया। जिसके बाद से मशीन एक बंद कमरे में धूल फांक रही है। स्थानीय निवासी सिन्हा सिंह, कुरोली निवासी गोपाल भारती का कहना है कि अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से सबसे ज्यादा दिक्कत बीपीएल परिवारों को उठानी पड़ती है। सरकारी अस्पताल में बीपीएल परिवारों को अल्ट्रासाउंड की निशुल्क सुविधा प्रदान की जाती है। लेकिन साहिया में यह सुविधा नहीं होने से लोगों का आधे से ज्यादा खर्च किराए के रूप में विकासनगर आने-जाने में ही निकल जाता है। कई बार अधिकारियों से अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की मांग की जा चुकी है। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं होती है।

जिले में रेडियोलॉजिस्ट की भारी कमी है। रिक्त पदों पर तैनाती के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। नई तैनाती होते ही अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की जाएगी।
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- डॉ. संजीव दत्त, डिप्टी सीएमओ

इन गांवों के लोग हो रहे प्रभावित
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने से साहिया बाजार, बुहार खेड़ा, साहिया छानी, उद्पाल्टा, कुरोली, बोहरी, खतासा, अलसी, सकनी, कनबुआ, ककाड़ी, पंजिया, बनसार, समाल्टा, पंचरा, भंजरा, पाटा, फटेऊ, झूसौ -भाकरौ, बमराड़, थैत्यो, मलेथा, दातनू ,बडनू , कोठा, तारली, पजिटीलानी, खमरोली, सलगा, चिबोऊ, टिपोऊ, चंदोऊ, खोई, सुरेऊ, उभरेऊ, अस्टी, आरा, दुनुवा, हाजा, दसऊ, गबेला समेत 40 से अधिक गांवों की आबादी प्रभावित हो रही है।
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