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अब एक क्लिक पर देख सकेंगे गंगा की निर्मलता

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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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गंगा जल की स्वच्छता जांचने के लिए आनेवाले दिनों में घाट-घाट भटकने की आवश्यकता नहीं रह जाएगी। जो निगरानी आदमी के भरोसे नहीं हो पाई उसे तकनीक के जरिए सुनिश्चित किया जा रहा है। नमामि गंगे परियोजना के तहत ऑनलाइन क्वालिटी मानिटरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। इससे 24 घंटे गंगा जल की स्वच्छता का आकड़ा मिलता रहेेगा। खास बात यह है कि गंगा की धारा कहां कितनी स्वच्छ या मैली हुई कहीं भी बैठे कर देखी जा सकेगी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का आगाज ऋषिकेश से हुआ है। तपोवन में पहला सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्सेस (स्काडा) तकनीक लागू कर दी गई है। गंगा निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई के परियोजना प्रबंधक संदीप कश्यप ने बताया कि इसी महीने स्वर्गाश्रम में ऑनलाइन मानिटरिंग सिस्टम लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद मुनिकीरेती, हरिद्वार और ऋषिकेश के सभी इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन (आईएनडी) केंद्रों पर इस तकनीक का इस्तेमाल होगा। इससे पल पल गंगा की सेहत का ब्योरा अपलोड होता रहेगा। रियल टाइम मानिटरिंग रिपोर्ट पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में साफ्टवेयर के जरिए सीधे अपलोड हो जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि कोई भी व्यक्ति कहीं से भी गंगा जल की स्वच्छता का ब्योरा एक क्लिक पर देख सकेगा। उत्तराखंड के बाद इस तकनीक का प्रयोग पश्चिम बंगाल और उप्र में भी लागू करने की योजना है। खासकर कानपुर में टनरियों का मलबा गंगा गिरने से रोका जा सकेगा। परियोजना से जुड़े अफसरों का दावा है कि 2019 तक गंगा को पूर्ण रूप से स्वच्छ कर लिया जाएगा। प्रति आईएनडी इस तकनीक पर करीब 50 से 60 लाख खर्च हो रहे हैं।
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पॉड के जरिए पता चलेगी पानी की गुणवत्ता
नई व्यवस्था के तहत आईएनडी केंद्रों पर गंगा में जगह-जगह पॉड डाले जाएंगे। खास साफ्टवेयर से लैस इन यंत्रों को कंप्यूटर या मोबाइल से अटैच किया जा सकेगा। ये वैसे ही काम करेगा जैसे सीसीटीवी कैमरों से मोबाइल को जोड़कर घर या दुकान की रखवाली की जाती है। गंगा की सेहत के प्रति पारदर्शी रवैया दर्शाने के लिए त्रिवेणीघाट पर डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाने की भी योजना है। इससे पलपल अपडेट हो रहे आकड़ों को देखा जा सकेगा।
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एसटीपी बंद होने की शिकायतें खत्म होंगी
गंगा की स्वच्छता सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड), बीओडी (बायोलॉजिकल डिमांड) और टीएसएस (टोटल सस्पेंडेड सॉलिड) के पैमाने पर आंकी जाती है। मानकों के मुताबिक सीओडी 250 मिग्रा प्रति लीटर, बीओडी 30 मिग्रा प्रति लीटर और टीएसएस 100 मिग्रा प्रति लीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। आदर्श स्थिति यह है कि सीओडी 100, बीओडी 10 और टीएसएस 100 मिग्रा प्रति लीटर बरकरार रहे। अभी तक इसके लिए एसटीपी प्लांटों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई बार मुनाफाखोरी के चक्कर में जेनरेटर बंद करने की शिकायतें मिलती रही हैं। इसके चक्कर में गंगा की हालत बदतर होती रही।
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