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कर्ज के दलदल में डूबा है जल संस्थान

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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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मुनिकीरेती। बिजली उपभोग करने के बाद बिल अदायगी सरकारी महकमे अक्सर बिजली विभाग को ठेंगा दिखात रहे हैं। इनमें में जल संस्थान नाक तक डूब चुका है और बकाएदारी चार करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। अब विभागीय अफसरों को नहीं समझ आ रहा है कि इस कर्जदारी से कैसे निबटें।
नगर के सबसे बड़े बिजली बिल बकाएदारों में अक्सर सरकारी महकमों के नाम ही शामिल होते हैं। इनमें जल संस्थान का स्तर सबसे ऊंचा है। कर्जदारों की श्रेणी में अव्वल जलसंस्थान लोगों को पानी सप्लाई तो कर रहा है, लेकिन पंप चलाने में खर्च हो रही बिजली का बिल अदा करना भूल चुका है। इसी तरह गंगा प्रदूषण बोर्ड भी बिजली बिल की 40 लाख की उधारी हो चुकी है। बिल अदायगी की बात पर बजट की कमी कहकर टाल जा रहा है। बकाएदारों में तीसरा नंबर नगर पालिका का है। नगर के विकास का जिम्मा उठाने वाली इस संस्था ने भी बिजली बिल लटकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। नगर पालिका वर्तमान में पांच लाख बिजली बिल की बकाएदार है।
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कर्जदारों में चौथा स्थान पटवारी चौकियों का है। बिजली बिल जमा न करने पर कई चौकियों के कनेक्शन कट चुके हैं। इसके बावजूद व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पाई है। एसडीओ सौरभ चमोली ने बताया कि विभागों को पत्र कई बार भेजे जा चुके हैं। बीते मार्च से बिलों का भुगतान नहीं हुआ है। अब बिजली विभाग बकाएदारों के खिलाफ नवंबर में नोटिस जारी करेगा। इसके बाद भी बिल जमा न हुए तो कनेक्शन काटने की कार्रवाई होगी।
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सौभाग्य योजना के तहत 250 कनेक्शन दिए गए
केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही सौभाग्य योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों अब तक 250 कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इसके अलावा 50 से अधिक लोगों के आवेदन जमा हो चुके हैं। टिहरी जनपद के तिमली गांव में सौ विद्युत कनेक्शन लगाने की प्रक्रिया जारी है।
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