श्रीनगर। स्थायी कैंपस निर्माण और अस्थायी कैंपस के सुविधाजनक स्थान में शिफ्टिंग की मांग के लिए एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के छात्र-छात्राओं ने दूसरे दिन भी कक्षाओं का बहिष्कार किया। छात्र-छात्राओं ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) को ज्ञापन भेजते हुए उक्त दोनों मांगों सहित सड़क दुर्घटना में घायल छात्राओं को आर्थिक मदद देने की मांग की है।
बीते तीन अक्तूबर को एनआईटी की दो छात्राओं नुपुर मुंडा और नीलम मीणा को हास्टल से लैब पैदल जाते समय एक कार ने टक्कर मार दी थी। नीलम अभी एम्स ऋषिकेश में भर्ती है। इस घटना से आक्रोशित छात्र-छात्राएं चार अक्तूबर से कक्षाओं का बहिष्कार कर परिसर में धरने पर बैठ गए। शुक्रवार को आंदोलित छात्र-छात्राओं ने एमएचआरडी को ज्ञापन भेजते हुए कहा कि उन्हें कक्षा पढ़ने जाने के लिए प्रतिदिन बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से होते हुए जाना पड़ता है, जिस पर चलना खतरे से खाली नहीं है। अस्थायी कैंपस की वजह से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। कहा कि श्रीनगर के दूरस्थ क्षेत्र में स्थित होने से इंडस्ट्री एक्सपर्ट और ख्याति प्राप्त प्रोफेसरों का मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। छात्रों ने कहा कि एनआईटी अपनी स्थापना के उद्देश्य में सफल नहीं हो पा रही है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को तत्काल सुरक्षित कैंपस में शिफ्ट करने और कैंपस के लिए जमीन का आवंटन किए जाने की मांग की। इधर, एनआईटी के कुलसचिव कर्नल सुखपाल सिंह ने बताया कि छात्र-छात्राओं से वार्ता चल रही है। हॉस्टल/कक्षा से लैब तक जाने के लिए बसें लगाई गई हैं।
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छात्रों के आंदोलन को मिला प्रजम का साथ
श्रीनगर। प्रगतिशील जनमंच ने एनआईटी के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए 10 नवंबर से पुन: आंदोलन छेड़ने का मन बना लिया है। प्रजम ने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को ज्ञापन भेजकर कैंपस के निर्माण की मांग की है।
प्रजम के अध्यक्ष अनिल स्वामी, सदानंद पुरी, जेपी पुरी, गणेश टम्टा, मोहन लाल, जेपी पोखरियाल, झाबर सिंह रावत, रमेश रावत और मुकेश अग्रवाल आदि ने कहा कि अधिग्रहीत भूमि पर तत्काल कैंपस निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने एनआईटी के छात्रों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि स्थायी कैंपस निर्माण ही उनकी समस्या का समाधान है।
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सन्दीप