ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान की ओर से देहरादून रोड स्थित कार्यालय में रविवार को साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ आयोजित किया गया, जिसके तहत परिवार में महिलाओं का पारंपरिक होना उचित या आधुनिक विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आयोजित साप्ताहिक ज्ञानयज्ञ कार्यक्रम का विश्व शांति हवन यज्ञ में आहुतियां डालकर विधिवत शुभारंभ किया गया। इस मौके पर मुख्य वक्ता प्रख्यात विचारक बजरंग मुनि ने कहा कि परिवार व्यवस्था के ठीक संचालन में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती है ।
परिवार में महिला या पुरुष एक-दूसरे के पूरक होते हैं। परिवार की आंतरिक व्यवस्था में महिलाएं व बाह्य में पुरुष प्रधान होते हैं। उन्होंने कहा कि परंपरागत परिवारों में आई विकृतियों के कारण महिलाएं पारंपरिक व्यवस्था की अपेक्षा आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। बजरंग मुनि के अनुसार परंपरागत परिवारों की महिलाओं में घुटन अधिक है, टूटन कम मगर आधुनिक महिलाओं में परिवार के प्रति टूटन की समस्या अधिक है, घुटन कम लिहाजा दोनों स्थितियां ठीक नहीं हैं।
उन्होंने बताया कि पुरुष प्रधान व्यवस्था विकृति नहीं बल्कि व्यवस्था है मगर परिवार का प्रमुख, परिवार प्रमुख तक सीमित रहना चाहिए मालिक नहीं। कहा कि वर्तमान पारंपरिक परिवारों में मुखिया मालिक बन गए हैं, जोकि एक मुख्य विकृति है। संस्थान के डॉ. राजे नेगी के संचालन में आयोजित संगोष्ठी में समाजसेवी कमल सिंह राणा, अभ्युदय द्विवेदी, जनार्दन कैरवान, सरदार हरिचरण सिंह, नवीन कुमार शर्मा, सुतिश गुप्ता, आरसी भट्ट, अनुसूया प्रसाद बंगवाल, सूरत सिंह रौथाण, विमला नौटियाल, संदीप सिंह, नरेश वर्मा, मंगल सिंह, टीकाराम देवरानी आदि मौजूद थे।