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अंश के आधार पर नहीं अब कब्जे के आधार पर मिलेगा मुआवजा

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कर्णप्रयाग। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से प्रभावित काश्तकारों को अब खाता खतौनी के आधार पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत ही मुआवजा वितरित किया जाएगा। शासन से मिले निर्देशों के बाद प्रशासन ने पूरे मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।
126 किमी लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पहाड़ के चारधाम यात्रा और चीन की अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ी होने के चलते महत्वपूर्ण है। इसके निर्माण के लिए इन दिनों भूमि अधिग्रहीत सहित प्रभावितों को मुआवजा वितरण की कार्रवाई चल रही है। चमोली जिले के कर्णप्रयाग और जिलासू तहसील में गौचर, रानौं, लोदला, लंगाली और सिवाई गांव रेल लाइन से प्रभावित हैं। इन पांच गांवों में 1200 से अधिक परिवार रेल परियोजना से प्रभावित हैं, जिन्हें परियोजना के मानकों के हिसाब से मुआवजा वितरण किया जाना है। इसके लिए करीब 123 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत है, लेकिन खाता खतौनी में कई लोगों का नाम होने से मुआवजा नहीं बंट पाया है। एसडीएम जीआर बिनवाल ने बताया कि खाता खतौनी में काश्तकारों के विरोध के चलते शासन की ओर से संशोधन किया गया है। शासन ने खाता खतौनी के बजाय व्यक्तिगत ही मुआवजा देने के निर्देश मिले हैं। अब कार्रवाई शुरू करते हुए जल्द मुआवजा वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
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ये हो रही थी दिक्कत
कर्णप्रयाग। परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति के अध्यक्ष गजेंद्र नयाल का कहना है कि पहाड़ में सभी जमीनें खाता खतौनी में होती हैं। इन जमीनों को परिवार अपने हिसाब से बांट कर यहां खेती और अन्य काम काम करते हैं। रेल परियोजना में किसी परिवार विशेष का खेत कटने पर उसका मुआवजा खतौनी में शामिल सहखातेधारकों को भी बंट रहा था, जबकि सहखातेधारकों की भूमि नहीं कट रही थी। ऐसे में सही प्रभावित को सही मुआवजा नहीं मिल पा रहा था। इसकी प्रशासन से लेकर शासन तक शिकायत करने के बाद अब राहत मिल पाई है।
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कहां कितनी भूमि होनी है अधिग्रहीत
रेल परियोजना के लिए गौचर के भटनगर में 19.566 हेक्टेयर, लंगाली में 1.596 हेक्टेयर, सिवाई लगा लोदला में 24.619 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जानी है। इसका मुआवजा प्रभावित काश्तकारों को वितरित किया जाना है।
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