ब्यूरो/अमर उजाला, त्यूनी
स्वास्थ्य विभाग के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के दुर्गम अंचलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। तहसील मुख्यालय से करीब 45 किमी की दूरी पर स्थित एलोपेथिक अस्पताल भटाड़ में बीते दो साल से चिकित्सक का पद रिक्त पड़ा है। पूरा अस्पताल महज एक फॉर्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा है। फॉर्मासिस्ट के छुट्टी या फिर सरकारी काम से बाहर जाने पर अस्पताल में ताला लटक जाता है। गंभीर रोगों के इलाज के लिए लोगों को त्यूनी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की दौड़ लगानी पड़ती है। लंबे समय से ग्रामीण अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती की मांग कर रहे हैं। लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी है। अस्पताल से कथियान, लोकाड़, डांगूठा, ऐथाण, खुदरा, डेरनाड़, पुरटाड़, फनार, भूट, ओबरासेर समेत 24 गांव की आबादी जुड़ी हुई है। ग्रामीण विरेंद्र शर्मा, मेजर सिंह, राजेश खत्री, हरदयाल सिंह का कहना है कि अस्पताल में फार्मासिस्ट के होने से उन्हें महज सर्दी, जुकाम और बुखार की दवाई और छोटी मोटी चोट की मरहमपट्टी ही हो पाती है। वहीं फॉर्मासिस्ट के छुट्टी पर होने के कारण कई बार उन्हें यह सुविधा भी नहीं मिल पाती। गंभीर बीमारी होने पर उन्हें 45 किमी दूर त्यूनी ही जाना पड़ता है। इस दौरान मरीजों की जान पर बन आती है।
------------------
पूरे जिले में डाक्टरों की कमी है। जितना संभव है व्यवस्था की जा रही है। नई नियुक्तियां होते ही प्राथमिकता के आधार पर रिक्त अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी।
- एस के गुप्ता, सीएमओ देहरादून