ब्यूरो/अमर उजाला, रायवाला। गौहरीमाफी में बीते बृहस्पतिवार की देर रात आई बाढ़ का खतरा भले ही कुछ समय के लिए टल गया है, लेकिन स्थानीय लोग जब भी उस पल को याद करते हैं तो सहम जाते हैं। बार-बार बाढ़ के खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन पर बाढ़ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं करने का आरोप लगाया। कहा कि शीघ्र उनकी सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए, तो वह गांव से पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि साल भर लोग जो मेहनत करते हैं, उसे बाढ़ का पानी बर्बाद कर देता है, ऐसे में खेती पर निर्भर लोगों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हुआ पड़ा है। सरकारी तंत्र से नाराज लोगों ने अपनी आपबीती कुछ इस तरह से बताई।
सरकार अस्थायी कार्यों पर भारी भरकम रकम खर्च कर रही है, लेकिन स्थायी इंतजाम करने पर जरा भी ध्यान नहीं है। आखिर कब तक इस तरह बाढ़ की त्रासदी झेलते रहेंगे। ऐसे में पलायन करना ही एकमात्र रास्ता बचा है। बाढ़ के पानी ने सब कुछ बर्बाद करके रख दिया है, हम बहुत हताश हो चुके हैं।
- मस्तराम कुलियाल, ग्रामीण गौहरीमाफी
लगातार बाढ़ की मार से सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान हुआ है। मैंने चक्की लघु उद्योग स्थापित कर लाखों की लागत से गांव में व्यवसाय शुरू किया है। बीते वर्ष बरसात में बाढ़ मेें भी मेेरे करीब 70 हजार के मशीन उपकरण खराब हुए थे और इस बार फिर मशीनों में बाढ़ का पानी घुसने से नुकसान हुआ है।
दिलराम नौटियाल, ग्रामीण व्यवसायी गौहरीमाफी
मेरी गौशाला में गाय बाढ़ के पानी की चपेट में आकर मर गई है। प्रशासन को अवगत कराया गया है। इसके अलावा घरों में भी पूरा बाढ़ का पानी घुसने से भारी नुकसान हुआ है। गांव में आजीविका का कोई साधन नहीं है। गाय का मुआवजा कब मिलता है, इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं है।
जीवानंद ममगाईं, ग्रामीण गौहरीमाफी
रात के अंधेर में घरों में चारपाई के नीचे पानी बढ़ रहा था। अचानक पानी के शोर के साथ आंख खुुली, तो देखा की बाढ़ ने चारों और से चपेट में ले लिया है। किसी तरह घर का सामान समेटा और सुरक्षित स्थानों की और जान बचाने के लिए भागना पड़ा। प्रशासन को जल्द पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करना चाहिए।
पुष्पा देवी, ग्रामीण गौहरीमाफी