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वेदनी में आज होगी मां नंदा की पूजा

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जोशीमठ। उर्गम घाटी में शनिवार को पूजा-अर्चना के साथ पांच दिवसीय नंदा स्वनुल नंदीकुंड लोकजात यात्रा शुरू हो गई है। गांव में पूजा के बाद उर्गम घाटी के 19 गांवों की नंदा छंतोली भक्तों के साथ नंदीकुंड के लिए रवाना हुईं। नंदीकुंड लोकजात में प्रतिभाग करने के लिए प्रवासी ग्रामीण भी अपने गांव पहुंचे हैं। शनिवार को देर शाम सभी छंतोलियां रात्रि प्रवास के लिए घाटी के फ्यूंलानारायण मंदिर पहुंचीं।
शनिवार को उर्गम घाटी के घंटाकर्ण मंदिर में पूर्वाह्न 11 बजे पूजा-अर्चना के बाद नंदा छंतोलियां जागर गीतों और मां नंदा के जयकारों के साथ फ्यूंलानारायण मंदिर के लिए रवाना हुईं। देर शाम सभी छंतोलियां मंदिर में पहुंच गईं। यहां भक्तों ने सबका भव्य स्वागत किया। रविवार को नंदा छंतोलियां मनपाई बुग्याल पहुंचेंगी। जहां मां नंदा की विशेष पूजा होगी। वहीं, पाणा गांव में आयोजित नंदा अष्टमी मेले के दूसरे दिन कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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गैरोली पातल पहुंची मां नंदा की डोली
देवाल। बधाण की ईष्ट देवी मां नंदा की लोकजात यात्रा रविवार (आज) को वेदनी पहुंचेगी। यहां दिन में वेदनी कुंड में पूजा के बाद नंदा की डोली वापस वांक गांव के लिए रवाना होगी। ग्रामीण हर साल कुरूड़ से वेदनी तक और वेदनी से देवराड़ा तक मां नंदा की डोली के साथ लोकजात यात्रा का आयोजन करते हैं। शनिवार देर शाम को यात्रा निर्जन पड़ाव गैरोली पातल पहुंची।
शनिवार की ब्रह्म मुहूर्त में वाण सहित अन्य गांवों के भक्तों ने मां नंदा देवी की पूजा की। देवी देवताओं के पश्वाओं ने श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इसके बाद यात्रा वाण से निर्जन पड़ाव गैरोली पातल पहुंची। यात्रा में खीम सिंह, रमेश कुनियाल, उमेश कुनियाल, खीमी राम, देवेद्र सिंह, हीरा पहाड़ी, कृष्णा बिष्ट, रघुवीर सिंह, पान सिंह, हीरा बुग्याली, बलबीर सिंह, पुजारी मंशा राम गौड़ आदि शामिल थे।

नंदा देवी कौथिग में हुए लोक संस्कृति के दर्शन
अगस्त्यमुनि। क्यूंजा घाटी के भणज गांव में आयोजित नंदा देवी कौथिग में पारंपरिक लोक संस्कृति के साक्षात दर्शन हुए। इस मौके पर ध्याणियों ने आराध्य की पूजा कर उन्हें शृंगार सामग्री और फल-फूल भेंट किए।
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तृतीय केदार तुंगनाथ धाम से पांच वर्ष बाद अपने मायके पहुंची मां नंदा देवी के दर्शनों के लिए सुबह से भक्तों की भीड़ जुटी रही। प्रात: 7 बजे पुजारियों ने देवी की पूजा-अर्चना कर भोग लगाया। दोपहर बाद मेला पांडाल में क्यूंजा, भणज, जयकंडी, चंद्रनगर, जाबरी, कोंथा सहित क्षेत्र के 15 से अधिक गांवों के महिला मंगल दल व महिला समूहों ने मांगल, जागर और लोक गीतों की एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुति दी। थड्या, चौंफला, झुमेला, छाछरी लोक नृत्यों के साथ मातृ शक्ति ने मेलार्थियों का मन मोह लिया। साथ ही नंदा के जागरों ने माहौल को भावुक बना दिया। मुख्य अतिथि एचएनबी केंद्रीय विवि के लोक संस्कृति एवं निस्पादन केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो. डीआर पुरोहित ने कहा कि नंदा पहाड़ के जीवन में रची-बसी बेटी और बहू है। उसके बिना यहां जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस तरह के आयोजन से हम अपनी लोक संस्कृति का संरक्षण कर सकते हैं। विशिष्ट अतिथि जेपी नौटियाल व रमेश पहाड़ी ने कहा कि नंदा के कौथिग से लोक संस्कृति को बल मिल रहा है और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच भी मिलता है। मेला समिति के संरक्षक व केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने कहा कि आगामी वर्षों में कौथिग को और भव्य बनाया जाएगा।

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आज का कार्यक्रम, तीन बजे से
अगस्त्यमुनि के क्यूंजा घाटी के भणज गांव में आयोजित नंदा देवी कौथिग का छठा दिन।
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