ब्यूरो/अमर उजाला, रायवाला। गौहरीमाफी गांव में खेती किसानी पर निर्भर ग्रामीणों के सामने इस बरसात में बाढ़ के चलते आजीविका का संकट खड़ा हो पैदा हो गया है। गौहरीमाफी निवासी किसान सेवा सहकारी समिति के सदस्य भगवती सेमवाल ने बताया कि गांव में धान की फसल पूरे क्षेत्र में सबसे अधिक उत्तम प्रजाति और अधिक पैदावार वाली है, मगर इस साल बाढ़ के प्रकोप के चलते किसानों को भारी नुकसान हुआ है। बृहस्पतिवार को देररात सौंग नदी में आई बाढ़ व उसका पानी गांव में घुसने से तैयार हो चुकी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से फसली नुकसान के मुआवजे का मानक बहुत कम है, जबकि किसानों द्वारा तैयार फसल को बाजार में बेचने पर एक बीघा खेती से करीब आठ हजार रुपये मिलते हैं, मगर प्रशासन मुआवजे के तौर पर किसानों को प्रति बीघे पर महज सात से आठ सौ रुपये का मुआवजा दिया जाता है। उन्होंने बाढ़ की विभीषिका झेल रहे गांव के किसानों के लिए सरकार से उचित मुआवजे की व्यवस्था की मांग की है।
धान की फसल को हुआ सबसे अधिक नुकसान
रायवाला। बृहस्पतिवार रात गौहरीमाफी में आई बाढ़ से इस बार सबसे ज्यादा नुकसान तैयार हो चुकी धान की फसल को पहुंचा है। पूरी तरह तैयार हो चुकी फसल की कटाई शुरू होने से ऐन पहले आफत बनकर आई बाढ़ के पानी के साथ कीचड़ और गाद ने गांव की करीब 100 बीघा फसल को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अधिकांश किसान प्रभावित हुए हैं।