ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। ग्रामसभा गौहरीमाफी में पिछले डेढ़ दशक से सौंग की बाढ़ हर साल कहर बरपा रही है। हर साल गांव में सौंग की बाढ़ का पानी घुस जाता है और लोगों के घरों में जलभराव के साथ ही जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। आंदोलन के बावजूद गांव की बाढ़ से सुरक्षा के लिए आज तक स्थायी इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिसके चलते 15 वर्षों से हर बरसात ग्रामीणों के लिए आफत बनी हुई है। खास बात यह है कि लगातार मांग व आंदोलन के बावजूद ग्रामीणों की सुनवाई नहीं हो रही है।
गौहरीमाफी में बाढ़ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के लिए सिंचाई विभाग की ऋषिकेश सब डिवीजन ने वर्ष 2013-14 में 20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था, मगर इस प्रस्ताव का आज तक स्वीकृति ही नहीं मिल पाई। वहीं, विभाग को पांच करोड़ 96 लाख रुपये गांव की सीमा पर सुरक्षा दीवार बनाने के लिए मिले थे। विभाग ने दीवार का निर्माण शुरू किया, तो गांव के राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क से सटे होने के चलते काम ठप हो गया।
आंदोलन से सुरक्षा नहीं, मिली बाढ़
गौहरीमाफी के ग्रामीण राज्य सरकार को पूर्व में बाढ़ की आशंका के मद्देनजर पहले ही आगाह कर चुके थे। उन्होंने बाढ़ सुरक्षा के स्थायी इंतजाम की मांग को लेकर आंदोलन भी किया, मगर उनके हिस्से सुरक्षा की बजाए सौंग की बाढ़ ही आई। ऋषिकेश विधानसभा सीट से पिछले तीन बार से विधायक और वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल भी गांव की लोगों की सुरक्षा के लिए उचित प्रबंधन कराने में नाकाम साबित होते नजर आ रहे हैं। जबकि वह ऋषिकेश से एक दशक से अधिक से समय क्षेत्र के विधायक हैं।
माननीयों के दौरों से आगे नहीं बढ़ी बात
गौहरीमाफी गांव की जनता सौंग की बाढ़ से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। महज दौरों से ही गांव के लोगों को बाढ़ से सुरक्षा का भरोसा दिया जा रहा है। हाल की बरसात में समूचे गांव को चपेट में लेने वाला सौंग नदी का पानी एक बार फिर बीते बृहस्पतिवार की रात को गांव में घुस गया। करीब एक दर्जन परिवारों के घरों में पानी घुसने पर उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाना पड़ा। गर्भवती महिला को रेस्क्यू करने में एसडीआरएफ और पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए।