कर्णप्रयाग। 22 वर्षों से दुर्गम विद्यालय में तैनात भागवत कोठियाल पढ़ाई के साथ ही बच्चों की खेल प्रतिभा को भी निखार रहे हैं। इसका ही परिणाम है कि अब तक डेढ़ दशक में 150 से अधिक बच्चे राज्य स्तर पर और चार बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में प्रतिभाग कर चुके हैं। भागवत कोठियाल गैरसैंण ब्लाक के राजकीय जूनियर हाईस्कूल लखेड़ी में कार्यरत हैं।
मूल रूप से नंदासैंण क्षेत्र के गिरतोली गांव के रहने वाले भागवत कोठियाल की प्रथम नियुक्ति वर्ष 1996 में देवाल के दुर्गम विद्यालय पिनाऊं में हुई। वर्ष 2002 में कोठियाल गैरसैंण के प्राइमरी स्कूल मैखोली पहुंचे। यहां कोठियाल ने बच्चों की खेलकूद की प्रतिभा को निखारना शुरू किया। इसका नतीजा रहा है कि वर्ष 2003 में प्राइमरी स्कूल मैखोली के नौ बच्चों ने स्कूली खेलकूद प्रतियोगिता में राज्य स्तर तक प्रतिभाग किया। वर्ष 2004 में 15 बच्चे, जिसमें 7 बालिकाएं थीं उन्होंने जिला स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया और राज्य स्तर पर प्रतिभाग किया। वर्ष 2004 में कोठियाल की जूनियर हाईस्कूल में पदोन्नति देवाल ब्लाक के सूया गांव में हुई। वर्ष 2005 में कोठियाल का तबादला फिर गैरसैंण के राजकीय जूनियर हाईस्कूल लखेड़ी में हो गया। वर्ष 2007 से अब तक राजकीय जूनियर हाईस्कूल लखेड़ी के 150 से अधिक बच्चे राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं खेल चुके हैं, जबकि वर्ष 2011-12 में विद्यालय की सुनीता ने, वर्ष 2014-15 में कविता ने और वर्ष 2017-18 में सुनील सिंह और रोशनी ने खो-खो की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया।
भागवत कोठियाल कहते हैं कि पहाड़ के विद्यालयों में सुगम दुर्गम नहीं बल्कि संसाधनों का विकास होना चाहिए। मैदान नहीं होने के बावजूद यहां खेल प्रतिभाएं हैं। अब तक खेल में अव्वल रहने वाले छात्र भरत सिंह और दीपक सिंह सेना में भर्ती हो चुके हैं। यदि बच्चों को बेहतर संसाधन मिलते तो राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करने वाले बच्चे आज प्रदेश की ओर से खेलों में प्रतिनिधित्व करते।