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उद्घाटन से पहले ही करोड़ों के घाट पर हो गया कटाव

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। अभी गंगा व हेंवल का जलस्तर लगभग सामान्य है, बारिश से इन नदियों में बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। मगर नदियों के जलस्तर में मामूली इजाफे में ही नमामि गंगे योजना के तहत फूलचट्टी में पांच करोड़ की लागत से बने नवनिर्मित स्नान घाट व श्मशान घाट को छूकर निकले पानी से ही कटाव शुरू हो गया है। ऐसे में यदि आने वाले दिनों में गंगा व हेंवल नदी में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होती है तो इन घाटों के जमींदोज होने की पूरी आशंका बन गई है।
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भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल बनाकर केंद्र की सत्ता में आई सरकार की नमामि गंगे योजना कैसे चल रही है, इसकी तस्दीक फूलचट्टी में हाल में पांच करोड़ की लागत से बने स्नान व श्मशान घाट की स्थिति करती है। नमामि गंगे योजना के तहत फूलचट्टी संगम पर कार्यदायी संस्था वेबकॉस लिमिटेड द्वारा बीते जुलाई माह में स्नान घाट व श्मशान घाट का निर्माण कार्य पूर्ण किया है।
फूलचट्टी संगम को गंगा व हेंवल नदी के लिहाज से हाई फ्लड जोन माना जाता है। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी ने ऐन संगम के निकट स्नान व श्मशान घाट का निर्माण किया है। जबकि इस बाबत करोड़ों के घाटों को फ्लड में प्रस्तावित करते वक्त ही ‘अमर उजाला’ ने संबंधित सिंचाई विभाग व निर्माण एजेंसी को आगाह किया था। मगर निर्माण एजेंसी के अभियंताओं ने तब यह दावा किया था कि फूलचट्टी संगम पर घाटों की योजना प्रस्तावित करने से पहले ही उन्होंने 100 साल के फ्लड का अध्ययन कर लिया है।
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अब घाट का निर्माण होने के बाद स्थिति यह है कि अभी तक की हल्की फुल्की बारिशों के चलते गंगा व हेंवल के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी ही दर्ज की गई है। इन नदियों में पानी की सामान्य बढ़ोतरी की स्थिति में ही पानी के घाटों को छूने से इनमें कटाव होने लगा है। बीते दिनों फूलचट्टी में बने स्नान घाट व श्मशान घाट की बेस दीवारों में कटाव हो चुका है। यह स्थिति तब है जबकि अभी इन दोनों नदियों के वर्ष 2013 व 14 में आई आपदा के दौरान बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। ऐसे में यदि इन नदियों में आने वाले दिनों में बाढ़ जैसे हालात पैदा होते हैं तो ऐसे में करोड़ों की लागत से बने घाटों के बहने के पूरे आसार हैं। मजेदार बात यह है कि बीते जुलाई माह में बने इस घाटों का अभी तक लोकार्पण भी नहीं हो पाया है।
सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, दिगंबर सिंह नेगी, देवेंद्र सिंह नेगी आदि का कहना है कि निर्माण एजेंसी ने फूलचट्टी में घाटों के निर्माण से पूर्व फ्लड एरिये का ठीक से अध्ययन नहीं किया है और न ही योजना को प्रस्तावित करने से पहले स्थानीय लोगों से ही कोई मशवरा किया गया है। उनका कहना है कि संगम के आसपास बाढ़ की स्थिति में नदियों का जलस्तर सौ मीटर से अधिक बढ़ जाता है। जबकि अभी सामान्य जलस्तर में ही घाटों पर कटाव होना योजना की गुणवत्ता पर खुद ब खुद सवाल पैदा करती है। उनका कहना है कि निर्माण एजेंसी को फ्लड में घाटों की सुरक्षा को लेकर अभी से प्रोटेक्शन वर्क कर लेना चाहिए।
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