ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व व्रत शास्त्रानुसार रविवार को रहेगा। जबकि वैष्णव, योगी, यती, सन्यासियों का व्रत सोमवार को रहेगा। उत्तराखंड ज्योतिष रत्न से सम्मानित आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि रविवार का यद्यपि दिन भर सप्तमी तिथि है, जबकि रात्रि 8 बजकर 40 मिनट से अष्टमी शुरू होगी। बताया कि इसी समय पर कृतिका नक्षत्र समाप्त होकर रोहिणी नक्षत्र आरंभ होगा। जिस नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ था। लिहाजा जन्माष्टमी का महत्व उस दिन रोहिणी नक्षत्र के साथ निहित होता है।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि दूसरे दिन यानि सोमवार को यद्यपि सूर्योदयकालीन उदयव्यापिनी अष्टमी तिथि है, जो रात्रि आठ बजे तक रहेगी और रोहिणी नक्षत्र भी लगभग 8 बजकर 10 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। लिहाजा उस दिन न तो निशीथव्यापिनी अष्टमी है और न ही रोहिणी नक्षत्र है। इसलिए ग्रहस्थ श्रद्धालुओं को रविवार को व्रत रखकर निशीथकाल में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाकर भोजन ग्रहण करना अभीष्ट रहेगा।
यह है विधान
प्रात:काल स्नानादि दैनिक कर्म से निवृत्त होकर तुलसी, पीले फूलों, बांसुरी, मोरपंख से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा सभी राशियों के जातकों को करनी चाहिए। श्रीसूक्त तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ अत्यंत लाभप्रद रहेगा।