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गूल के निरीक्षण के लिए पहुंचे एई और जेई का घेराव

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ब्यूरो/अमर उजाला/त्यूनी।
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मेंद्रथ स्थित सिंचाई गूल का निरीक्षण करने पहुंचे सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता महकार सिंह और अवर अभियंता प्रतीक सिंह का ग्रामीणों ने घेराव कर जमकर हंगामा किया। उन्होंने अधिकारियों पर क्षेत्रीय उपेक्षा का आरोप लगाया।
ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से क्षेत्र में सिंचाई गूलें क्षतिग्रस्त हैं। जिस कारण काश्तकार खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। गर्मियों और सर्दियों में कृषि भूमि सिंचाई के अभाव में बंजर हो जाती है। पूरी खेतीबाड़ी बारिश पर निर्भर है। हर बार विभाग बजट की कमी बता गूल मरम्मत से पल्ला झाड़ लेता है। कहा यदि विभाग जल्द ही क्षेत्र में क्षतिग्रस्त सिंचाई गूलों की मरम्मत नहीं कराता तो ग्रामीणों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सहायक अभियंता ने बताया कि क्षतिग्रस्त गूलों की मरम्मत के लिए नाबार्ड, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और टीएसपी योजना के तहत करीब 70 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। जिसे जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। घेराव करने वालों में रमेश सिंह, रामलाल, नीटू, नीरज, सोनू, रतीराम, हरदयाल सिंह, प्रदीप आदि शामिल रहे।
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400 सिंचाई गूलों की हालत खस्ता
त्यूनी/चकराता। लंबे समय से सिंचाई विभाग ने जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर की क्षतिग्रस्त सिंचाई गूलों की कोई सुध नहीं ली है। जिस कारण क्षेत्र की करीब 400 सिंचाई गूलें जर्जरहाल हो गई हैं। ज्यादातर सिंचाई गूल आपदा का दंश झेल रही हैं। जिस कारण काश्तकार खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। काश्तकार नरेंद्र रावत, आत्माराम शर्मा, प्रभाकर जोशी, मदन सिंह, करम चंद राणा आदि का कहना है कि हर बार विभाग बजट का रोना बता गूल मरम्मत से पल्ला झाड़ लेता है।
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इन गूलों की हालत खस्ता
कांगशील खेड़ा, मैंद्रथ, सैंज, मजोग, लखवाड़, हनोल, अलसी खेड़ा, शंठगधार, गैसूर, पुरटाड़, शाप्ट, चांदनी, बैगूनी, कुल्हा, नीवा, दारागाड़ समेत 400 गूले क्षतिग्रस्त हैं।
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