ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। उत्तराखंड कैबिनेट के एक फैसले से राज्य परिवहन निगम की वर्कशॉप में डीजल पंप संचालन का मामला खटाई पड़ गया है। कैबिनेट ने निगम प्रबंधन को वर्कशॉप (कार्यशाला) के लिए लीज पर ली गई वनभूमि के एवज में उक्त भूमि के सर्किल रेट की रकम एचआरडीए को जमा कराने के लिए कहा है। जिस पर निगम ने आर्थिक दिक्कतों के चलते असमर्थता जता दी है। वर्तमान में जिस स्थान पर निगम की वर्कशॉप संचालित हो रही है, उस भूमि की सर्किल रेट के हिसाब से रकम लगभग 18 करोड़ रुपये बैठ रही है। जबकि पेट्रोल पंप की भूमि की धनराशि भी करीब दो करोड़ 56 लाख रुपये के आसपास है।
यदि शासन सरकारी इकाई होने के नाते इस रकम को माफ नहीं करता है, तो निगम को पंप संचालन के लिए अनुमति के लिए ही एचआरडीए को करोड़ों रुपये की धनराशि का भुगतना करना होगा। उत्तराखंड परिवहन निगम के ऋषिकेश रोडवेज डिपो को वर्ष 2012 में ऋषिकेश-देहरादून मार्ग पर वन विभाग ने एक एकड़ भूमि वर्कशॉप के लिए लीज पर दी थी। निगम की ओर से बसों की रिपेयरिंग के साथ ही कार्यशाला में डीजल पंप भी स्थापित किया गया, लेकिन तमाम विभागों से एनओसी लेने के बावजूद अभी तक पंप का संचालन शुरू नहीं हो पाया। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) की ओर से एनओसी नहीं देने पर मामला राज्य सरकार की कैबिनेट तक पहुंचा।
निजी पंप से भरना पड़ रहा डीजल
रोडवेज की स्थानीय डिपो की 50 बसें रोजाना विभिन्न रूटों पर दौड़ती हैं। इन बसों का ईंधन शहर के एक निजी पेट्रोल पंप से लेना पड़ रहा है। खास बात यह है कि निगम को डीजल की खरीदारी में सरकारी महकमा होने की वजह से रियायत मिलती है, मगर खुद का पंप नहीं होने से उन्हें बाजार मूल्य पर ही डीजल खरीदना पड़ रहा है, जिससे निगम पर वित्तीय भार और ज्यादा बढ़ रहा है।
डीजल पंप का क्या है पूरा मामला
तीर्थनगरी वर्ष 2010 में ऋषिकेश रोडवेज बस अड्डे को चारधाम यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड में शिफ्ट किया गया। इसके बाद स्थायी अड्डे के लिए वन विभाग की ऋषिकेश-देहरादून मार्ग स्थित एक एकड़ भूमि निगम को वर्ष 2012 में लीज पर मिली। बस अड्डा शिफ्ट करने के विरोध के चलते निगम की कार्यशाला का संचालन उक्त भूमि पर वर्ष 2015 में शुरू किया गया। इसके बाद डीजल पंप के लिए छह महकमों के जिम्मेदार अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मांगा गया, जिसमें डीएम, पूर्ति विभाग, एसडीएम, दमकल विभाग, एसएसपी, एचआरडीए शामिल हैं। इनमें छह महकमों के अधिकारियों द्वारा एनओसी जारी कर दी गई। जबकि एचडीआरए ने यह कहकर एनओसी देने से इनकार दिया कि उक्त भूमि मास्टर प्लान 2011 के तहत पी-3 कुंभ मेला क्षेत्र में है।
कोट्स
प्रबंध निदेशक के माध्यम से शासन को उक्त भूमि के सर्किल रेट की रकम को माफ करने का आग्रह किया गया है। इस बाबत एमडी ने एक पत्र भी शासन को प्रेषित किया है। अनुमति मिलती है, तो डीजल पंप का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
- दीपक जैन, महाप्रबंधक, उत्तराखंड परिवहन निगम।