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मां नंदा की लोकजात का हुआ श्रीगणेश

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घाट (चमोली)। जय मां नंदा के जयकारों के साथ मंगलवार को सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में मां नंदा की लोकजात का श्रीगणेश हो गया है। विधि-विधान से सुबह 11 बजे दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियां सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में स्थापित की गई। 30 अगस्त को मां नंदा की डोलियां कैलाश के लिए प्रस्थान करेंगी। वहीं कुरुड़ गांव में तीन दिवसीय मां नंदा लोकजात मेला भी शुरू हो गया है।
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लोकजात में बधाण व दशोली की मां नंदा की डोलियां विभिन्न पड़ावों से होते हुए 17 सितंबर को नंदा सप्तमी के दिन पूजा-अर्चना के बाद अपने-अपने क्षेत्रों के लिए प्रस्थान करेंगी। बधाण की मां नंदा वेदनी बुग्याल में पूजा-अर्चना के बाद छह माह के लिए अपने ननिहाल देवराड़ा में विराजमान हो जाएगी।
मंगलवार को सुबह छह बजे से मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में मां नंदा की विशेष पूजाएं संपन्न हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मंशाराम गौड़, मुंशी चंद्र, योगेश्वर प्रसाद, राकेश, कन्हैया प्रसाद, मनोहर, सत्य प्रसाद, धनीराम और राजेश गौड़ ने गणेश पूजा के बाद मां नंदा का आह्वान किया। दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियों पर शक्ति चढ़ाई गई। सुबह करीब 11 बजे दोनों डोलियां गर्भगृह से मंडप में स्थापित की गई। इस दौरान मां नंदा ने अपने पश्वा पर अवतरित होकर मंदिर में मौजूद अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया। वहीं, कुरुड़ गांव में तीन दिवसीय नंदा लोकजात सांस्कृतिक मेला भी शुरू हो गया है। मेले का शुभारंभ भाजपा के मंडल अध्यक्ष दिलवर सिंह रावत ने किया। इस दौरान स्कूली छात्र-छात्राओं ने लोकगीत नंदा तेरी जात कैलाश लिजौला सजी-धजीक.., कुरुड़ की नंदा तू दैंणी ह्वै जा.., चार दिन स्वामीजी में मैतुड़ा जयुंन.. आदि गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दी। इस मौके पर मेला समिति के अध्यक्ष राकेश गौड़, सांसद प्रतिनिधि अब्बल सिंह, भरत रावत, मुकुंद पुरोहित, राकेश रावत, राजा मेंदुली, भागवत सिंह, बसंती देवी, देवकी देवी आदि मौजूद थे।
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