ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कारों में इस बार उत्तराखंड को एक भी पुरस्कार नहीं मिल पाया है। 24 अगस्त को हुई राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा के बाद शिक्षकों में काफी रोष दिखाई दे रहा है। बताया गया कि बीते वर्षों में केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से राज्य से अधिकतम आठ शिक्षकों को यह सम्मान दिया जाता रहा है, लेकिन इस बार एक बार शिक्षक को पुरस्कार के लिए योग्य नहीं पाया गया। युवा वैज्ञानिक सम्मान से नवाजे जा चुके डॉ. अतुल बमराड़ा ने बताया कि नई प्रक्रिया के चलते पूरे देश के 6615 शिक्षकों की ओर से आवेदन किया गया था, जिसमें से महज 45 शिक्षकों को राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया।
राज्य स्तरीय समिति ने उत्तराखंड के 39 अभ्यर्थियों के शैक्षिक व अकादमिक पृष्ठभूमि का अध्ययन कर राज्य के सर्वश्रेष्ठ तीन शिक्षकों के नाम राष्ट्रीय स्तर पर सुझाए थे। इन शिक्षकों में पिथौरागढ़ के प्रधानाचार्य कौस्तुभचंद्र जोशी शामिल थे, जिन्हें कि राष्ट्रीय आईसीटी पुरस्कार 2016 व शैलेश मटियानी पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। दूसरे शिक्षक आदर्श विद्यालय गंगा भोगपुर, यमकेश्वर के डॉ. अतुल बमराड़ा जो कि आईसीटी का प्रयोग कर विद्यालय को अंतरराष्ट्रीय पटल पर लाने में सफलता हासिल कर चुके हैं और यूकोस्ट द्वारा उन्हें बीते वर्ष युवा वैज्ञानिक सम्मान से नवाजा जा चुका है। जबकि तीसरे शिक्षक चमोली जिले के प्रवक्ता भास्करानंद डिमरी शामिल हैं, जोकि बालिका शिक्षा के क्षेत्र में बीते 30 वर्षों से विशेषरूप से कार्यरत हैं।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड को प्रतिनिधित्व नहीं मिलना उनके साथ ही राज्य में कार्यरत 60 हजार अन्य शिक्षकों को भी हतोत्साहित करने वाला निर्णय है। उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री व सभी सांसदों से आग्रह किया है कि इस मुद्दे को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तक पहुंचाकर राज्य का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की सिफारिश की जानी चाहिए।