ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। राज्य की डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड की सड़कों का गड्ढामुक्त तो करना चाहती है, मगर इस शर्त पर कि इसके लिए धेला भी खर्च नहीं हो। पीडब्ल्यूडी को इसके लिए वार्षिक मरम्मत (एएम) एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिलना इसकी तस्दीक करता है। विभाग की ऋषिकेश डिवीजन को डिमांड के बावजूद अभी तक वार्षिक मरम्मत मद में सरकार से एक रुपया तक नहीं मिल पाया है, जिससे अस्थायी खंड ऋषिकेश के अंतर्गत तमाम सड़कों की मरम्मत अधर में लटकी है। इसका खामियाजा हर रोज वाहन सवारों को जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है।
दरअसल, लोक निर्माण विभाग की ऋषिकेश अस्थायी डिवीजन के पास लगभग 300 किलोमीटर की सड़कें हैं। इनमें से अधिकांश सड़कें बरसात में उधड़ चुकी हैं। कुछ स्थानों पर सड़कों से बारिश के चलते बीएमएसडीबीसी लेयर डामरीकरण तक गायब हो चुका है। डोईवाला और ऋषिकेेश की कई सड़कों की हालत इसकी तस्दीक करती हैं। डिवीजन के मुताबिक इन क्षेत्रों में विभिन्न सड़कों के लगभग 20 किलोमीटर के हिस्से बदहाल स्थिति में है।
ऐसे में वार्षिक मरम्मत मद की रकम नहीं मिलने के चलते किस तरह से इन सड़कों की हालत को दुुरुस्त किया जाएगा। खास बात यह है कि 300 किमी. के अलावा करीब 550 किलोमीटर की सड़क की रखरखाव का जिम्मा भी लोनिवि के ऋषिकेश अस्थायी खंड के पास ही है। बावजूद अभी तक शासन की ओर से धनराशि अवमुक्त नहीं किए जाने से उक्त सड़कों के हाल भी बुरे ही हैं। बरसात में गड्ढों से जानलेवा हो चुकी सड़कों पर लोग जान हथेली पर लेकर सफर कर रहे हैं। लिहाजा, सरकार की ओर से सड़कों को गड्ढामुक्त करने का दावा हवा हवाई ही साबित होता नजर आ रहा है।
कोट्स
वार्षिक मरम्मत मद के लिए प्रस्ताव भेजने के बाद कई दफा रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। अभी तक इस मद में शासन से कोई धनराशि नहीं मिली है। बजट मिलने पर सड़कों की मरम्मत का कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
बलराम मिश्रा, अधिशासी अभियंता, लोनिवि।