गोपेश्वर। सुदूर हिमालय की तलहटी में फैले बुग्यालों में इन दिनों राज्य पुष्प ब्रह्मकमल अपनी खुशबू बिखेर रहा है। बदरीनाथ धाम के साथ ही भगवान नारायण और भोलेनाथ का शृंगार ब्रह्मकमल के फूलों से ही किया जाता है।
चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के आसपास बुग्यालों में उगने वाले ब्रह्मकमल की खुशबू इन दिनों तीर्थयात्रियों के साथ ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। भक्तों को रुद्रनाथ के प्रसाद के रूप में ब्रह्मकमल ही दिया जाता है। हेमकुंड साहिब के आस्था पथ पर भी कई जगहों पर ब्रह्मकमल के पुष्प तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान मंडल के वैज्ञानिक विजय प्रसाद भट्ट बताते हैं कि ब्रह्मकमल का वानस्पतिक नाम ससोरिया ओबोलेटा है। यह दुर्लभ पुष्प 3000 से 5000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है।