ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व देहरादून जिला प्रशासन को तीर्थनगरी ऋषिकेश के नगर क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण कर बनाए गए मठ-मंदिरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील करने का आदेश पारित किया है। न्यायालय ने उक्त आदेश सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार गुप्ता के द्वारा दायर जनहित याचिका के आधार पर दिया है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद तीर्थनगरी में करोड़ों की लागत से बने चारधाम यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड पर अतिक्रमण से मुक्त होने की उम्मीद जगी है। देश-दुनिया के सैलानियों की आवाजाही के लिहाज से सूबे के महत्वपूर्ण शहरों में शुमार ऋषिकेश में मौजूदा अव्यवस्थाओं के प्रति राज्य सरकार और दून प्रशासन के रवैये को यहां केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की वित्तीय सहायता से 12 करोड़ की लागत से बने चारधाम बस ट्रांजिट कंपाउंड की स्थिति से समझा जा सकता है।
वर्ष 2009-10 में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की ओर से उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऋषिकेश में चारधाम यात्रा बीटीसी के निर्माण के लिए 12 करोड़ की मंजूरी दी गई। जिसकी जिम्मेदारी उत्तरप्रदेश निर्माण निगम को सौंपी गई। वर्ष 2010-11 में जब यूपी निर्माण निगम ने केंद्रीय निधि से योजना का निर्माण कार्य शुरू कराया तो तत्कालीन बस अड्डे के प्लेटफार्म पर जगह जगह डेढ़ सौ से अधिक अवैध अतिक्रमण व खोखे खड़े थे।
योजना के क्रियान्वयन से पहले बस अड्डे के प्लेटफार्म को अतिक्रमण मुक्त कराकर निर्माण एजेंसी यूपी निर्माण निगम को सौंपने की जहमत जिला व तहसील प्रशासन, नगर निकाय और वन विभाग ने नहीं उठाई। लिहाजा प्लेटफार्म पर जगह जगह कब्जा कर रखे गए खोखों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट कराकर एजेंसी को जैसे तैसे बीटीसी का नया प्लेटफार्म तैयार करना पड़ा। प्लेटफार्म के पक्के होने के बाद बीटीसी कैंपस में कब्जे और अधिक बढ़ गए।
बसों को नहीं अतिक्रमण को मिली जगह
वर्तमान में स्थिति यह है कि चारधाम और गढ़वाल मंडल के लोकल रूटों पर संचालित होने वाली संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति और निजी परिवहन की नौ कंपनियों के वाहनों को पार्क करने के लिए यहां आज तक पार्किंग का आवंटन नहीं हो पाया है। वजह जिन स्थानों पर बसों को पार्किंग आवंटित की जानी हैं वह स्थान राजनीतिक संरक्षण के चलते अतिक्रमण की जद में है। जिसके कारण देश-दुनिया के सैलानियों को परेशान होना पड़ रहा है।
बीटीसी के कब्जों के लिए कई महकमे जिम्मेदार
चारधाम बीटीसी के कब्जों की जद में आने के लिए राज्य सरकार के कई महकमे सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, जिनके खिलाफ सरकार व जिला प्रशासन ने आज तक एक्शन लेने की जहमत नहीं उठाई। बस ट्रांजिट कंपाउंड बनने से पहले उक्त भूमि वन विभाग के अधीन थी, जिस पर लोगों ने कब्जों की शुरुआत की और एक के बाद एक सैकड़ों खोखे लगाकर वन भूमि पर अतिक्रमण कर लिया गया। मगर मामले में फारेस्ट विभाग चुप्पी साधे रहा। अवैध कब्जाधारियों को ऊर्जा निगम की ओर से अस्थायी खोखों पर बिजली के स्थायी कनेक्शन आवंटित कर दिए गए। इतना ही नहीं तत्कालीन नगर पालिका की ओर से अवैध कब्जाधारियों से तहबाजारी की वसूली का राजस्व अर्जित किया गया, जबकि यही कार्य वर्तमान में नगर निगम भी कर रहा है।
कोट्स
सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण को लेकर न्यायालय के आदेश के बाबत जानकारी मिली है। आदेश का अध्ययन करने के बाद सभी महकमों की हाई पावर कमेटी गठित की जाएगी, इसके बाद ही इस दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
- उत्तम सिंह नेगी, सहायक नगर आयुक्त नगर निगम।