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बुग्यालों में पर्यटकों की सीमित आवाजाही से पर्यटन व्यवसाय पड़ेगा ठंडा-compat

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गोपेश्वर। चमोली जिला चारों ओर से बुग्यालों से घिरा हुआ है। उच्च हिमालय क्षेत्र की तलहटी में सुरम्य बुग्याल पर्यटकों और सैलानियों की पहली पसंद हैं। हर वर्ष बुग्यालों के सैर-सपाटे के लिए सैकड़ों पर्यटक उमड़ते हैं। हाईकोर्ट के आदेश लागू होने पर बुग्यालों और उच्च हिमालय क्षेत्र की घाटियों में पर्यटकों की आवाजाही सीमित होने से जिले का पर्यटन व्यवसाय प्रभावित होने की आशंका है?
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समुद्रतल से 7138 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चतुर्थ केदार रुद्रनाथ तक पहुंचने के लिए पर्यटक पांच बुग्याल क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं। इन बुग्यालों में स्थानीय लोग अस्थायी हट्स स्थापित कर पर्यटकों के लिए सुविधाएं मुहैया कराते हैं। पनार ऑली, गौरसों, ल्वींठी, क्वांरीपास, डालीसेरा, द्रोणागिरी, कालागट्ठा, लोहाजंग, बेदनी बुग्याल में वर्षभर पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है। एडवेंचर सोसाइटी से जुड़े संजय कुंवर का कहना है कि जोशीमठ क्षेत्र के अधिकांश लोगों का मुख्य व्यवसाय पर्यटन है। यहां वर्षभर देशी-विदेशी पर्यटक औली, गौरसों, फूलों की घाटी, चैनाप बुग्याल के सैर-सपाटे पर पहुंचते हैं। न्यायालय के आदेशों के बाद पर्यटन व्यवसाय प्रभावित हो सकता है। इधर, बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ एनएन पांडेय का कहना है कि न्यायालय के आदेश के तहत बुग्यालों में कोई भी पर्यटक रात्रि प्रवास नहीं कर सकेगा और फाइबर हट्स पूरी तरह से हटा ली जाएंगी। वे बताते हैं कि पर्यटन स्थलों के सैर-सपाटे के बाद पर्यटक निचले क्षेत्रों में रात्रि प्रवास के लिए आ सकते हैं। न्यायालय के फैसले के बाद बुग्यालों का अच्छे ढंग से संरक्षण भी हो पाएगा।
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