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विधायकों की पेंशन समाप्त कराने को कोर्ट जाएगा मोर्चा

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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
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विधायकों की पेंशन समाप्त करने को लेकर जनसंघर्ष मोर्चा ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है।
बुधवार को विकासनगर स्थित होटल में प्रेसवार्ता करते हुए मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश की माली हालत बेहद खराब है। प्रदेश पर 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। ब्याज चुकाने के लिए भी सरकार कर्ज ले रही है। ऐसे माली हालत में विधायकों को पेंशन देकर सरकार राजस्व पर आर्थिक बोझ डाल रही है। वर्ष 2008 में विधायकों को छह हजार रुपये पेंशन मिलती थी। लेकिन आज यह आंकड़ा बढ़कर 40 हजार रुपये प्रति माह पर पहुंच गया है। 65 वर्ष के पश्चात पेंशन में पांच फीसदी, 70 वर्ष पर 10 फीसदी, 75 वर्ष पर 25 फीसदी और 80 वर्ष के बाद 50 फीसदी की बढ़ोतरी का प्राविधान है।
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पेंशन लेकर विधायक समाज सेवक न होकर सरकारी सेवक बन गए हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है। सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्ष 2005 के बाद से पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं है, सिर्फ अंशदायी पेंशन है। लेकिन पूर्व विधायकों को जीवन पर्यंत पेंशन की व्यवस्था है। कहा कि जहां प्रदेश के हजारों वर्कचार्ज और तदर्थ कर्मियों को 30-35 वर्ष की सेवा करने के बाद भी पेंशन नहीं मिल रही है। वहीं, सरकार ने 10 वर्ष के अंतराल में विधायकों की पेंशन में लगभग सात फीसदी का इजाफा कर दिया है। प्रेसवार्ता में मोर्चा के महासचिव आकाश पंवार, दिलबाग सिंह, ओपी राणा, गजपाल रावत, पिन्नी शर्मा मौजूद रहे।
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