श्रीनगर। मुझे प्रेम की अमर पुरी में रहने दो..अपना सब कुछ देकर कुछ आंसू बहने दो.. जैसी कविताओं का पाठ कर हिम कवि चंद्र कुंवर बर्त्वाल को याद किया गया। इस दौरान साहित्यिक चर्चा व गोष्ठी भी आयोजित की गई।
हिम कवि चंद्र कुंवर बर्त्वाल की जयंती पर हिमालय साहित्य कला परिषद की ओर से कवि सम्मेलन व साहित्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन में देवेंद्र उनियाल ने अब छाया में गुंजन होगा, संगीता फरासी ने घिरे प्रलय की घोर घटाएं, राधा मैंदोली ने मुझको तो हिम से भरे हुए अपने पहाड़ ही प्यारे हैं, राजेंद्र प्रसाद ने मुझको इतनी ऊंचाई मत देना, आरती पुंडीर ने मुझको मुझको डुबा निज काव्य में हे स्वर्ग सरि मंदाकनी, नयन कोठियाल ने क्या पाया क्या खोया जग में, पूनम रतूड़ी ने मुझे प्रेम की अमर पुरी में रहने दो कविता पाठ किया। कार्यक्रम के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई व प्रसिद्ध साहित्यकार तथा वरिष्ठ पत्रकार चारुचंद चंदोला को श्रद्धांजलि दी गई।