श्रीनगर। संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाने के लिए गढ़वाल विवि के संस्कृत विभाग की ओर से प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है। प्रशिक्षण के लिए उम्र व शैक्षणिक योग्यता की कोई बाध्यता नहीं है। प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की ओर से प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे।
गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर में संस्कृत भाषा सीखने के लिए 20 अगस्त से पंजीकरण शुरू हो गए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए एमएचआरडी ने देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों व केंद्रीय विवि में इसके लिए एक प्रशिक्षक की नियुक्ति की है। प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (डीम्ड यूनिवर्सिटी) की ओर से संचालित किया जा रहा है। गढ़वाल विवि में प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए नियुक्त प्रशिक्षक राधाकांत ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य संस्कृत भाषा को आम बोलचाल की भाषा बनाना है। प्रशिक्षण के लिए किसी प्रकार की कोई बाध्यता नहीं है। कोई भी व्यक्ति प्रशिक्षण में प्रतिभाग कर सकता है। प्रशिक्षण एक वर्ष तक दिया जाएगा। इच्छुक अभ्यर्थी गढ़वाल विवि के संस्कृत विभाग स्थित अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र पर पंजीकरण करा सकते हैं।